भारतीय शेयर बाजार के लिए यह हफ्ता भी निराशाजनक रहा। लगातार तीसरे हफ्ते गिरावट दर्ज की गई है और BSE का मार्केट कैप **₹2 लाख करोड़** से ज्यादा घट गया है। विदेशी निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली बाजार पर भारी पड़ रही है, हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने कुछ हद तक सपोर्ट देने की कोशिश की है।
बाजार का हाल और FIIs का दबाव
भारतीय शेयर बाजार फिलहाल कठिन दौर से गुजर रहा है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का निकासी का दौर लगातार पांचवें हफ्ते जारी है। पिछले कुछ हफ्तों में विदेशी निवेशकों ने कुल ₹11,490.03 करोड़ के शेयर बेचे हैं। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाजार को संभालने की पूरी कोशिश करते हुए ₹16,398.15 करोड़ की खरीदारी की है, लेकिन ग्लोबल दबाव इतना ज्यादा है कि निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
प्रमुख इंडेक्स का प्रदर्शन
BSE Sensex 0.53% गिरकर 73,895.74 पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 में 0.88% की गिरावट आई और यह 23,140.5 पर आ गया। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स पर दबाव और ज्यादा दिखा, जहां Nifty Midcap 100 में 2% और Nifty Smallcap 100 में करीब 1% की गिरावट देखी गई।
सेक्टर का रोटेशन
बाजार में अब डिफेंसिव सेक्टरों की ओर रुझान बढ़ रहा है। ग्लोबल मैक्रो फैक्टर्स और बढ़ते बॉन्ड यील्ड के कारण निवेशकों ने IT (गिरावट: 2.4%) और प्राइवेट बैंकों (गिरावट: 1.5%) से दूरी बनाई है। वहीं, दूसरी तरफ Pharma, FMCG और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 1% की बढ़त दिखी है। रियल एस्टेट सेक्टर ने 3% की मजबूती दिखाई है, जो निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।
आगे का रास्ता
एक्सपर्ट्स की मानें तो Nifty 50 के लिए 23,300 का स्तर एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। बाजार के सेंटीमेंट को न्यूट्रल करने के लिए इंडेक्स का 23,600 के स्तर को पार करना बेहद जरूरी है। फिलहाल, निवेशकों को ग्लोबल संकेतों और विदेशी निवेश के रुख पर नजर रखने की सलाह दी जा रही है।
