2 सितंबर, 2026 को भारतीय शेयर बाजार में बड़ी बिकवाली देखने को मिली। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण क्रूड ऑयल की कीमतें **$97** प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं, जिसका सीधा असर भारतीय इक्विटी मार्केट पर पड़ा और सेंसेक्स **788** अंक लुढ़क गया।
बुधवार, 2 सितंबर, 2026 को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बेहद सुस्त रही। BSE सेंसेक्स 788.52 अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 50 भी 23,800 के अहम मनोवैज्ञानिक स्तर को तोड़कर 23,786.80 पर कारोबार करता दिखा। बाजार में यह बिकवाली अचानक आई है, जिसने हालिया स्थिरता को पूरी तरह खत्म कर दिया है।
कच्चे तेल की कीमतों का दबाव
बाजार में इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतें उछलकर $97 प्रति बैरल के स्तर के करीब पहुंच गई हैं। भारत के लिए यह एक बड़ी चिंता है क्योंकि हम अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी आयात पर निर्भर हैं। तेल के दाम बढ़ने से सरकारी खजाने पर आयात का बोझ बढ़ेगा, जिससे रुपया कमजोर हो सकता है और घरेलू कंपनियों पर महंगाई का दबाव देखने को मिल सकता है।
ग्लोबल मार्केट में 'रिस्क-ऑफ' का दौर
यह गिरावट सिर्फ भारत तक सीमित नहीं है। वैश्विक स्तर पर निवेशक अब जोखिम लेने से बच रहे हैं (Risk-off sentiment)। वैश्विक बॉन्ड यील्ड में तेजी के कारण शेयरों के वैल्यूएशन पर दबाव है, जिससे संस्थागत निवेशकों ने अपनी होल्डिंग्स को फिर से तौलना शुरू कर दिया है।
निवेशकों के लिए आगे की राह
बाजार में इस उतार-चढ़ाव के बीच, निवेशकों को क्रूड ऑयल की कीमतों पर बारीक नजर रखने की जरूरत है। साथ ही, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) के निवेश पैटर्न पर भी नजर रखनी होगी, क्योंकि बाजार की अस्थिरता के दौरान उनकी भूमिका सबसे अहम होती है। आने वाली तिमाहियों में कंपनियों के मुनाफे पर ऊर्जा लागत का असर देखने को मिल सकता है, जो निवेशकों के लिए अगला बड़ा ट्रिगर होगा।
