ग्लोबल मार्केट से मिले खराब संकेतों और मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के चलते भारतीय शेयर बाजार में आज बड़ी बिकवाली देखने को मिली। Nifty **23,800** के स्तर के नीचे फिसला और Sensex में **700** से ज्यादा अंकों की भारी गिरावट दर्ज की गई।
ऊर्जा संकट और बॉन्ड यील्ड का असर
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने एनर्जी सप्लाई चेन को लेकर बड़ी चिंताएं पैदा कर दी हैं। इसका नतीजा यह हुआ है कि ब्रेंट क्रूड ऑयल $96 प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। भारत के लिए, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी आयात पर निर्भर है, यह स्थिति महंगाई को और भड़का सकती है। निवेशकों को डर है कि क्रूड की बढ़ी हुई कीमतें कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव डालेंगी, जिसे मांग कमजोर होने के कारण ग्राहकों पर डालना मुश्किल होगा।
साथ ही, ग्लोबल बॉन्ड यील्ड में उछाल ने भी मार्केट का मूड बिगाड़ा है। जब सुरक्षित निवेश माने जाने वाले US ट्रेजरी नोट्स पर यील्ड बढ़ती है, तो इक्विटी मार्केट का आकर्षण कम हो जाता है। इससे भारतीय कंपनियों के लिए फंड जुटाना महंगा हो गया है, जो विशेष रूप से उन कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण है जिन पर कर्ज का बोझ ज्यादा है।
सेक्टर का हाल और मार्केट ब्रेथ
आज की बिकवाली का असर चौतरफा रहा। ऑटो (Auto), रियल्टी (Realty) और IT जैसे सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में दिखे, क्योंकि निवेशकों ने रिस्क-ऑफ (Risk-off) सेंटीमेंट अपनाते हुए सुरक्षित ठिकानों की ओर रुख किया है। निफ्टी IT इंडेक्स में भी सुस्ती साफ दिखी।
हालांकि, बाजार की इस अफरा-तफरी के बीच Adani Ports और Sun Pharma जैसे डिफेंसिव शेयरों में थोड़ी मजबूती दिखी। निवेशक अक्सर बाजार की ऐसी अस्थिरता के दौरान उन शेयरों को चुनते हैं जिनका सीधा ताल्लुक इकोनॉमिक साइकल से कम होता है। फिलहाल, निवेशकों की नजरें कच्चे तेल की कीमतों और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड की चाल पर टिकी हैं। जब तक इन मोर्चों पर स्थिति साफ नहीं होती, बाजार में हाई वोलेटिलिटी बनी रहने की आशंका है।
