भारतीय शेयर बाज़ार में आज यानी 6 अगस्त 2026 को अच्छी शुरुआत की उम्मीद है। GIFT Nifty में करीब **40** अंकों की बढ़त देखी जा रही है, जो बाज़ार में पॉज़िटिव सेंटिमेंट का इशारा दे रहा है। आज का फोकस कॉर्पोरेट रिजल्ट्स पर रहेगा, क्योंकि LIC, Trent, और Hero MotoCorp जैसी **160** से ज़्यादा कंपनियाँ अप्रैल-जून तिमाही के अपने नतीजे पेश करेंगी।
ग्लोबल संकेतों का मिलाजुला असर, घरेलू बाज़ार तैयार
आज भारतीय शेयर बाज़ार में पॉज़िटिव ओपनिंग की उम्मीद है। GIFT Nifty में लगभग 40 अंकों की बढ़त देखने को मिल रही है। यह शुरुआती तेज़ी घरेलू बाज़ार की मजबूती को दर्शाती है, भले ही ग्लोबल संकेत मिले-जुले हों।
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी, अमेरिकी बाज़ार में रिकॉर्ड
निवेशक कच्चे तेल की कीमतों पर पैनी नज़र रखे हुए हैं, जो फिलहाल $79 प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत में सकारात्मक प्रगति के बाद कीमतों में थोड़ी नरमी आई है। व्यापारिक मार्गों के खुलने की उम्मीद से सप्लाई चेन को राहत मिलने की संभावना है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तस्वीर मिली-जुली है; अमेरिकी बाज़ार में Dow Jones ने रिकॉर्ड स्तर छुआ, लेकिन टेक्नोलॉजी शेयरों में बिकवाली के चलते अन्य बड़े अमेरिकी सूचकांकों में गिरावट आई।
इनकमिंग नतीजे: 160+ कंपनियों के नतीजों का इंतज़ार
घरेलू बाज़ार में, अब सारा ध्यान अप्रैल-जून तिमाही के नतीजों पर है, जिसे फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली तिमाही भी कहा जाता है। हाल ही में रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने पॉलिसी रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा था, ऐसे में निवेशक कंपनियों के प्रदर्शन से ताज़ातरीन संकेत की उम्मीद कर रहे हैं। आज LIC, Britannia, Trent, Hero MotoCorp, और Lupin जैसी 160 से ज़्यादा बड़ी कंपनियाँ अपने वित्तीय नतीजे जारी करने वाली हैं। निवेशकों के लिए इन नतीजों का सबसे अहम हिस्सा मैनेजमेंट द्वारा भविष्य की मांग, इनपुट लागत और ग्रोथ प्लान्स पर दी जाने वाली गाइडेंस होगी।
FIIs और DIIs का खेल जारी
इंस्टीट्यूशनल निवेशकों के बीच लगातार खरीद-बिक्री का खेल देखने को मिल रहा है। बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने बाज़ार से करीब ₹943 करोड़ निकाले, यानी वे नेट सेलर रहे। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने बाज़ार को सहारा दिया और ₹2,883 करोड़ का निवेश किया, जिससे बिकवाली के दबाव को कम करने में मदद मिली।
आगे क्या? ध्यान रखें ये जोखिम
आगे चलकर, निवेशक अमेरिका-ईरान शांति वार्ता पर नज़र बनाए रखें। इस कूटनीतिक प्रयास में किसी भी तरह के नकारात्मक मोड़ से कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आ सकता है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक जोखिम कारक है। इसके अलावा, आज आने वाले नतीजों की भारी संख्या के कारण सेक्टर-विशिष्ट उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि बाज़ार इन नतीजों और मैनेजमेंट के आउटलुक को समझेगा।
