20 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाजार में तेज़ी की उम्मीद है, क्योंकि अमेरिकी ट्रेजरी (U.S. Treasury) के दखल से ग्लोबल बॉन्ड यील्ड्स (Global Bond Yields) में स्थिरता आई है। इससे Nifty 50 सात दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ सकता है। हालांकि, ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) की कीमतें $92 प्रति बैरल के करीब बनी हुई हैं और मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) ऊर्जा लागत और महंगाई को लेकर अनिश्चितता पैदा कर रहे हैं, जिससे बाजार की बढ़त सीमित रह सकती है।
अमेरिकी ट्रेजरी के एक्शन से मिली राहत
20 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाजार में तेजी की शुरुआत होने की संभावना है। वैश्विक सेंटिमेंट (Global Sentiment) में आए सकारात्मक बदलाव को यह दर्शाता है। अमेरिकी ट्रेजरी (U.S. Treasury) ने लंबे समय के बॉन्ड्स की बायबैक (Buyback) राशि बढ़ाकर कर्ज बाजार में दखल दिया है। इस कदम ने बॉन्ड यील्ड्स को हाल के 19-साल के उच्चतम स्तर से नीचे लाने में मदद की है, जिससे निवेशकों को राहत मिली है जो उधार लेने की बढ़ती लागत को लेकर चिंतित थे।
Nifty 50 में वापसी की उम्मीद
बेंचमार्क Nifty 50 इंडेक्स, जिसने लगातार सात सत्रों में गिरावट दर्ज की थी, में अब वापसी के संकेत दिख रहे हैं। GIFT Nifty फ्यूचर्स (Futures) एक सकारात्मक शुरुआत की ओर इशारा कर रहे हैं। बॉन्ड यील्ड्स में पिछली वृद्धि ने इक्विटी बाजारों (Equity Markets) पर नकारात्मक प्रभाव डाला था, क्योंकि उच्च यील्ड्स अक्सर वैश्विक निवेशकों को भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित संपत्तियों में लगाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं। इन यील्ड्स का स्थिरीकरण सेंटिमेंट के लिए एक महत्वपूर्ण विकास है, क्योंकि यह जोखिम लेने की क्षमता पर पड़ने वाले तत्काल दबाव को कम करता है।
बाहरी जोखिमों पर बनी रहेगी नज़र
सकारात्मक शुरुआत के बावजूद, बाजार प्रतिभागी बाहरी जोखिमों के कारण सतर्क बने हुए हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) की कीमतें वर्तमान में लगभग $92 प्रति बैरल पर बनी हुई हैं। भारत जैसे शुद्ध तेल-आयात करने वाले देश के लिए, ऊर्जा की ऊंची कीमतें एक महत्वपूर्ण चिंता का विषय हैं, क्योंकि यह महंगाई बढ़ा सकती हैं, राष्ट्रीय व्यापार संतुलन (Trade Balance) को प्रभावित कर सकती हैं और रुपये पर दबाव डाल सकती हैं। इन कारकों से बाजार की रिकवरी (Recovery) सीमित रहने की उम्मीद है।
भू-राजनीतिक तनाव का असर
इसके अलावा, मध्य पूर्व में चल रहा भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions), विशेष रूप से शिपिंग मार्गों (Shipping Lanes) और अमेरिका-ईरान संबंधों (U.S.-Iran Relations) को प्रभावित करने वाले, अनिश्चितता पैदा कर रहे हैं। यह समझना मुश्किल बना रहा है कि बॉन्ड बाजार में वर्तमान स्थिरीकरण लंबे समय तक चलेगा या यह केवल एक अस्थायी समायोजन है। निवेशक संस्थागत गतिविधि (Institutional Activity) पर भी करीब से नजर रख रहे हैं; 19 अगस्त को, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) दोनों ने भारतीय इक्विटी (Equities) में खरीदारी की थी। संस्थागत समर्थन की यह प्रवृत्ति जारी रहती है या नहीं, यह आने वाले सत्रों में बाजार अपनी तेजी बनाए रख पाता है या नहीं, इसका एक प्रमुख कारक होगा।
