Indian Markets: US-Iran जंग और कच्चे तेल में आग, आज बाजार में भारी दबाव के आसार

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
Indian Markets: US-Iran जंग और कच्चे तेल में आग, आज बाजार में भारी दबाव के आसार

31 अगस्त, 2026 को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सुस्त होने के संकेत मिल रहे हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, साथ ही फेडरल रिजर्व के रुख से भी बाजार पर दबाव है।

मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, कच्चे तेल में उछाल

बाजार का सेंटीमेंट खराब होने की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव का तेज होना है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने एयरबेस को निशाना बनाया है। इस भू-राजनीतिक अस्थिरता के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) की कीमतें $89 प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गई हैं। भारत के लिए, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें महंगाई बढ़ाने और ट्रेड बैलेंस बिगाड़ने का काम करती हैं, जो सीधे तौर पर कंपनियों के मार्जिन पर असर डालती हैं।

फेडरल रिजर्व का रुख बना सिरदर्द

केवल युद्ध ही नहीं, बल्कि ग्लोबल मॉनेटरी पॉलिसी भी निवेशकों के लिए एक बड़ा चिंता का विषय है। जैक्सन होल संगोष्ठी में फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श ने महंगाई पर कड़ा रुख बरकरार रखा है। इससे सितंबर में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीद 60% तक बढ़ गई है। जब अमेरिका में दरें बढ़ती हैं, तो डॉलर मजबूत होता है और विदेशी निवेशक उभरते बाजारों (जैसे इंडिया) से पैसा निकालकर सुरक्षित अमेरिकी बॉन्ड्स में शिफ्ट करने लगते हैं।

FIIs और DIIs का आमना-सामना

हालिया सत्रों में विदेशी और घरेलू निवेशकों के बीच खींचतान साफ दिख रही है। पिछले कारोबारी दिन में विदेशी निवेशकों (FIIs) ने ₹5,000 करोड़ से ज्यादा के शेयर बेचे हैं, जबकि घरेलू निवेशकों (DIIs) ने ₹5,183 करोड़ की खरीदारी करके बाजार को सहारा देने की कोशिश की है। अब देखना यह है कि क्या घरेलू लिक्विडिटी वैश्विक दबाव को झेल पाएगी।

बाजार की नजरें इन लेवल पर

अगले कुछ दिनों में भारत के Q1 फाइनेंशियल ईयर 2027 के GDP आंकड़े और अमेरिका की नॉन-फार्म पेरोल रिपोर्ट बाजार की चाल तय करेंगे। टेक्निकल फ्रंट पर, निफ्टी के लिए 24,100 का लेवल काफी अहम है और 24,000 एक मजबूत सपोर्ट के तौर पर देखा जा रहा है। अगर निफ्टी इस सपोर्ट को तोड़ता है, तो बाजार में और अधिक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.