Indian Markets: बाजार में लौटी रौनक, फेड प्रमुख के भाषण और SEBI के नए प्रस्तावों पर टिकी निगाहें

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
Indian Markets: बाजार में लौटी रौनक, फेड प्रमुख के भाषण और SEBI के नए प्रस्तावों पर टिकी निगाहें

शुक्रवार को भारतीय बाजारों में दो दिन की गिरावट के बाद रिकवरी देखने को मिली है। निवेशक फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के जैक्सन होल संबोधन का इंतजार कर रहे हैं, वहीं SEBI ने छोटी कंपनियों के लिए नियमों में ढील का प्रस्ताव रखा है।

बाजार की चाल और रिकवरी

शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स में तेजी के साथ कारोबार की शुरुआत हुई। लगातार दो दिनों की गिरावट के बाद बाजार संभलते दिखे। BSE Sensex करीब 0.25% बढ़कर 77,128 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जबकि Nifty 50 भी 24,122 के स्तर को पार करने में सफल रहा। इस तेजी में IT सेक्टर का बड़ा योगदान है। यह रिकवरी गुरुवार की अस्थिरता के बाद आई है, जो एक्सचेंज के नए 'क्लोजिंग ऑक्शन सेशन' नियमों के तहत पहली मंथली डेरिवेटिव्स एक्सपायरी थी।

जैक्सन होल और वैश्विक चिंताएं

ग्लोबल मार्केट का सेंटीमेंट अभी भी सतर्क बना हुआ है। पूरी दुनिया की नजरें 'जैक्सन होल इकोनॉमिक सिंपोजियम' पर हैं। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श का पहला कीनोट एड्रेस होने वाला है, जिससे अमेरिकी ब्याज दरों (US Interest Rates) के भविष्य के संकेत मिल सकते हैं। निवेशक यह जानना चाहते हैं कि अमेरिकी सेंट्रल बैंक अपनी पॉलिसी में कोई बदलाव करेगा या नहीं। इसके अलावा, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और US ट्रेजरी यील्ड का बढ़ता दबाव उभरते बाजारों (Emerging Markets) के लिए चुनौती बना हुआ है।

SEBI का बड़ा कदम

घरेलू स्तर पर SEBI ने एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है, जिसका मकसद छोटी कंपनियों के लिए फंड जुटाने की प्रक्रिया को आसान बनाना है। रेगुलेटर ने ₹10,000 फेस वैल्यू वाले प्राइवेट प्लेसमेंट के लिए 'मर्चेंट बैंकर' की नियुक्ति को अनिवार्य शर्त से हटाने का प्रस्ताव दिया है। SEBI का मानना है कि मौजूदा नियमों और कम संख्या में मौजूद डेट-फोक्स्ड मर्चेंट बैंकरों के कारण छोटी कंपनियों पर लागत का बोझ बढ़ गया था।

प्रस्तावित ढांचे के तहत, वे कंपनियां जो पहले से रेगुलेटेड हैं, कम से कम 1 साल का लिस्टिंग इतिहास रखती हैं, और जिन पर कोई डिफॉल्ट या पेनल्टी नहीं है, उन्हें इस छूट का फायदा मिलेगा। यह कदम मध्य-आकार की कंपनियों को बिना किसी अतिरिक्त बोझ के डेट मार्केट से पैसा जुटाने में मदद करेगा।

निवेशकों के लिए आगे का रास्ता

बाजार की आने वाली दिशा पूरी तरह से फेडरल रिजर्व की टिप्पणी पर निर्भर करेगी। एक तरफ जहां SEBI का फैसला छोटी कंपनियों के लिए सकारात्मक है, वहीं दूसरी तरफ वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और हाई-इंटरेस्ट रेट का असर बाजार पर हावी है। आने वाले हफ्तों में तरलता (Liquidity) और निवेश के रुझान को समझने के लिए निवेशकों को जैक्सन होल से आने वाले आधिकारिक बयानों पर बारीकी से नजर रखनी होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.