भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछले 8 हफ्ते किसी बुरे सपने से कम नहीं रहे हैं। विदेशी निवेशकों (FIIs) ने सिर्फ **4 दिनों** में **₹35,000 करोड़** के शेयर बेच दिए हैं। बढ़ती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों के चलते निफ्टी **200-वीक मूविंग एवरेज** के नीचे फिसल गया है।
भारतीय बाजार पिछले 8 हफ्तों से लगातार लाल निशान में बंद हो रहा है, जो पिछले 25 सालों में पहली बार हुआ है। इस दौरान निफ्टी 50 (Nifty 50) 22,421 के स्तर पर आ गया है, जबकि सेंसेक्स (BSE Sensex) 71,909 पर सिमट गया है। बाजार पर चौतरफा बिकवाली का दबाव बना हुआ है।
बिकवाली की असली वजह क्या है?
इस गिरावट के पीछे सबसे बड़े जिम्मेदार विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) हैं। अक्टूबर की शुरुआत में मात्र 4 ट्रेडिंग सेशन के भीतर उन्होंने करीब ₹35,000 करोड़ की बिकवाली की है।
बाजार को दो तरफ से मार पड़ रही है:
- अमेरिकी बॉन्ड यील्ड: अमेरिका में 10-year Treasury yields का 5.3% के ऊपर निकल जाना निवेशकों को भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट से पैसा निकालकर सुरक्षित अमेरिकी एसेट्स की ओर खींच रहा है।
- कच्चा तेल: ब्रेंट क्रूड (Brent crude) का $100 प्रति बैरल के आसपास बने रहना भारत के लिए चिंताजनक है। इससे आयात बिल बढ़ता है और देश में महंगाई का खतरा बढ़ जाता है।
टेक्निकल चार्ट पर खतरे की घंटी
निफ्टी 50 का 200-वीक मूविंग एवरेज के नीचे जाना तकनीकी रूप से बेहद कमजोर संकेत है। यह सपोर्ट लेवल साल 2020 की महामारी वाली गिरावट के बाद से कभी नहीं टूटा था। इस स्तर के टूटने के बाद अब संस्थागत स्तर पर ऑटोमेटेड सेलिंग ट्रिगर हो रही है, जो बाजार में और उतार-चढ़ाव पैदा कर सकती है।
अब सबकी नजरें 5-7 अक्टूबर को होने वाली RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक पर टिकी हैं। निवेशक यह देखना चाहते हैं कि केंद्रीय बैंक वैश्विक दबावों के बीच ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाता है।
