ग्लोबल टेंशन और RBI के डर से बाजार में आई गिरावट
आज, 5 फरवरी को भारतीय शेयर बाजारों में गिरावट देखने को मिली। पिछले दिनों की तेजी पर ब्रेक लग गया, क्योंकि ग्लोबल मार्केट से मिले कमजोर संकेत, खासकर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव और टेक शेयरों में हो रही बिकवाली ने निवेशकों को डरा दिया। इसके अलावा, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की आने वाली पॉलिसी का इंतजार भी बाजार की सुस्ती की वजह बना।
वैश्विक बाजारों पर दबाव, भारतीय शेयर भी फिसले
एशियाई बाजारों में आज, 5 फरवरी को मायूसी छाई रही। दक्षिण कोरिया का Kospi इंडेक्स करीब 4% लुढ़क गया, जबकि जापान का Nikkei 225 और शंघाई का SSE Composite भी गिरावट पर थे। हॉन्गकॉन्ग का Hang Seng ही थोड़ा संभल पाया। यूरोप के बाजार भी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे। यह ग्लोबल मंदी सीधे भारतीय बाजारों पर भी हावी दिखी, जिससे प्रॉफिट-बुकिंग बढ़ गई। कल, 4 फरवरी को अमेरिकी बाजारों का हाल मिला-जुला रहा था, Dow Jones 0.53% चढ़ा, लेकिन S&P 500 और Nasdaq Composite 0.51% और 1.51% गिरे, जिसका मुख्य कारण टेक शेयरों में आई कमजोरी थी।
IT सेक्टर में बड़ी गिरावट, मेटल सेक्टर में कुछ राहत
बाजार के अंदरूनी हालात भी काफी मिले-जुले रहे। IT सेक्टर में लगातार बिकवाली जारी रही। Infosys तो कल, 4 फरवरी को करीब 6 साल की सबसे बड़ी गिरावट पर बंद हुआ, शेयर 7.3% गिर गया और कंपनी की मार्केट कैप लगभग ₹56,000 करोड़ घट गई। AI और ऑटोमेशन से सॉफ्टवेयर सर्विसेज पर पड़ने वाले असर की चिंताओं ने IT शेयरों पर दबाव बनाए रखा। इसके विपरीत, मेटल सेक्टर में कुछ मजबूती दिखी। Hindalco Industries भले ही गिरा, लेकिन Tata Steel जैसे शेयरों में 1.13% की तेजी देखी गई। 2026 में भारतीय मेटल सेक्टर के लिए आउटलुक पॉजिटिव बना हुआ है, जिसका कारण कीमतों में बढ़ोतरी और सरकारी नीतियों का सपोर्ट है। कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी सेगमेंट के शेयर Trent ने कल Sensex को आउटपरफॉर्म करते हुए 3.08% की छलांग लगाई, लेकिन कंपनी के ग्रोथ में सुस्ती के संकेत हैं। Trent के Q3FY26 के नतीजे बताते हैं कि रेवेन्यू में 16% का सालाना ग्रोथ हुआ, पर वैल्यू फैशन और सप्लाई चेन की दिक्कतें थोड़ी भारी पड़ीं, हालांकि मार्जिन में सुधार हुआ।
निवेशक 'रुको और देखो' की राह पर, RBI कमेंट्री पर टिकी निगाहें
फिलहाल, निवेशक किसी नए घरेलू ट्रिगर के अभाव में 'रुको और देखो' की रणनीति अपना रहे हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मौद्रिक नीति मीटिंग का इंतजार है, जहां ब्याज दरों में कोई बदलाव की उम्मीद कम है। एनालिस्ट्स का मानना है कि RBI की महंगाई और ग्रोथ पर टिप्पणी के साथ-साथ हाल ही में घोषित US-India ट्रेड डील की बारीकियों पर बाजार की आगे की दिशा टिकी रहेगी। पिछले कारोबारी सत्र, 4 फरवरी को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹29.79 करोड़ के शेयर खरीदे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ₹249.54 करोड़ की खरीदारी की। Nifty 50 का P/E रेश्यो फिलहाल करीब 22.21 है, और Sensex 50 का P/E करीब 22.9 है। ये आंकड़े बहुत ज्यादा ऐतिहासिक तो नहीं हैं, लेकिन ग्लोबल अनिश्चितताओं और कुछ सेक्टरों में मार्जिन पर पड़ने वाले दबाव को देखते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। ऐसे माहौल में, बड़े इंडेक्स दांव लगाने के बजाय, चुनिंदा स्टॉक्स पर ध्यान देना बेहतर हो सकता है। निवेशक ग्लोबल मैक्रो ट्रेंड्स और इंस्टीट्यूशनल फ्लोज़ पर कड़ी नजर रख रहे हैं।
