25 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाज़ार की शुरुआत कमजोर रहने की उम्मीद है। अमेरिकी बाज़ार में टेक्नोलॉजी शेयरों में आई गिरावट और वैश्विक अनिश्चितता के चलते निवेशकों की सेंटिमेंट कमजोर है।
अमेरिकी बाज़ार में बिकवाली का असर
25 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाज़ार, जिसमें निफ्टी 50 और BSE Sensex शामिल हैं, लाल निशान में खुल सकते हैं। शुरुआती संकेत, जैसे कि GIFT Nifty, करीब 45 से 70 अंकों की गिरावट का इशारा कर रहे हैं। यह गिरावट 24 अगस्त के सत्र के बाद अपेक्षित है, जब निफ्टी 50 0.14% गिरकर 24,219.05 पर और Sensex 0.22% गिरकर 77,369.11 पर बंद हुआ था।
इस सावधानी का मुख्य कारण अमेरिकी इक्विटी बाज़ारों का नकारात्मक प्रदर्शन रहा है, खासकर टेक्नोलॉजी सेक्टर में। प्रमुख सेमीकंडक्टर शेयरों में आई बिकवाली, जिसमें Nvidia की कमाई के नतीजों से पहले गिरावट शामिल है, ने वैश्विक स्तर पर जोखिम लेने की क्षमता को कम कर दिया है। जब प्रमुख अमेरिकी टेक शेयर गिरते हैं, तो इसका असर ग्रोथ-केंद्रित इक्विटी बाज़ारों पर पड़ता है।
भू-राजनीतिक तनाव और डोमेस्टिक संकेत
टेक्नोलॉजी सेक्टर की अस्थिरता के अलावा, निवेशक ईरान पर संभावित आर्थिक प्रतिबंधों के प्रभाव का आकलन कर रहे हैं। भू-राजनीतिक चिंताएं अक्सर वैश्विक तेल की कीमतों और बॉन्ड यील्ड को प्रभावित करती हैं, जो अप्रत्यक्ष रूप से भारत जैसे उभरते बाज़ारों पर दबाव डाल सकती हैं। इसके अतिरिक्त, India VIX, जो बाज़ार की अस्थिरता को मापता है, पिछले सत्र में 2.90% बढ़ गया, जो दर्शाता है कि ट्रेडर्स निकट भविष्य में अधिक उतार-चढ़ाव की उम्मीद कर रहे हैं।
घरेलू बाज़ार की चाल विदेशी और स्थानीय निवेशकों के बीच खींचतान दिखाती है। जहाँ डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) लगातार समर्थन दे रहे हैं, वहीं फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) की लगातार बिकवाली ने इंडेक्स की बढ़त को सीमित कर दिया है। बाज़ार वर्तमान में एक रेंज में फंसा हुआ है, और दिशा की इस कमी के कारण अक्सर वैश्विक संकेतों के नकारात्मक होने पर प्रॉफिट-बुकिंग होती है।
आने वाले दिनों में निवेशकों का मुख्य ध्यान प्रमुख वैश्विक टेक कंपनियों के कमाई के आंकड़े और स्थानीय बाज़ार की स्थिरता पर रहेगा, क्योंकि वह इन बाहरी दबावों से निपट रहा है। बाज़ार सहभागियों द्वारा यह ट्रैक किए जाने की संभावना है कि क्या डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल बाइंग किसी भी भारी FII बिकवाली की भरपाई कर सकती है, और क्या निफ्टी बाज़ार की अस्थिरता में वृद्धि के बावजूद अपने सपोर्ट लेवल को बनाए रख सकता है।
