Nifty 50 और BSE Sensex लगातार सात हफ्तों से लाल निशान में हैं। विदेशी निवेशकों (FIIs) की तरफ से **$26 बिलियन** की भारी बिकवाली और 200-दिन के मूविंग एवरेज के टूटने से बाजार का सेंटिमेंट बिगड़ गया है।
भारतीय शेयर बाजार फिलहाल एक बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है। Nifty 50 और BSE Sensex में लगातार 7 हफ्तों से जारी गिरावट पिछले कुछ सालों के सबसे लंबे दौर में से एक है। इस गिरावट में सबसे चिंताजनक संकेत 200-दिन के मूविंग एवरेज का टूटना है। संस्थागत निवेशकों के लिए यह स्तर मार्केट की हेल्थ का पैमाना होता है, जिसके नीचे जाने से अक्सर एल्गोरिदम-आधारित और पैनिक सेलिंग शुरू हो जाती है।
बिकवाली की असली वजह क्या है?
बाजार में इस भारी गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) का रुख है। साल की शुरुआत से अब तक FIIs ने भारतीय बाजार से करीब $26 बिलियन की पूंजी निकाल ली है। इसका मुख्य कारण वैश्विक स्तर पर बढ़ रही बॉन्ड यील्ड है, जो फिक्स्ड इनकम इंस्ट्रूमेंट्स को इक्विटी के मुकाबले ज्यादा आकर्षक बना रही है। साथ ही, डॉलर के मुकाबले रुपये में आ रही कमजोरी ने विदेशी निवेशकों के रिटर्न को और कम कर दिया है, जिससे वे तेजी से अपना पैसा वापस निकाल रहे हैं।
मैक्रो इकोनॉमिक प्रेशर
भारत के लिए क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें एक बड़ा सिरदर्द बनी हुई हैं। ऊर्जा का बड़ा आयातक होने के नाते, तेल के दाम बढ़ने से इम्पॉर्ट बिल (Import Bill) बढ़ता है, जिसका सीधा असर करेंट अकाउंट डेफिसिट और महंगाई पर पड़ता है। इसके अलावा, ग्लोबल फंड मैनेजर्स अब अपना पैसा एआई (AI) ग्रोथ वाले बाजारों की ओर शिफ्ट कर रहे हैं, जिससे भारत जैसे कंजम्पशन-हेवी मार्केट्स फिलहाल उनकी प्राथमिकता में नहीं हैं।
अब निवेशकों की नजरें कहां?
घरेलू निवेशकों का पार्टिसिपेशन बाजार को सहारा देने की कोशिश कर रहा है, लेकिन बिकवाली का मौजूदा स्केल काफी बड़ा है। आने वाले समय में, RBI की पॉलिसी मीटिंग, महंगाई के आंकड़े और कंपनियों के अर्निंग्स मार्जिन पर निवेशकों की कड़ी नजर होगी। मार्केट की दिशा बदलने के लिए यह देखना जरूरी होगा कि क्या इंडेक्स वापस अपने 200-दिन के महत्वपूर्ण टेक्निकल सपोर्ट लेवल को दोबारा हासिल कर पाता है या नहीं।
