17 सितंबर 2026 को भारतीय शेयर बाजार में गिरावट के साथ शुरुआत होने की आशंका है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में **25 बेसिस पॉइंट्स** की बढ़ोतरी के बाद ग्लोबल सेंटीमेंट बिगड़ा है और विदेशी निवेशक सतर्क हो गए हैं।
भारतीय इक्विटी मार्केट आज सतर्क रुख अपनाते हुए नजर आ रहे हैं। शुरुआती संकेतों की बात करें, तो GIFT Nifty में 50 से 60 पॉइंट्स की गिरावट देखने को मिल रही है। यह कमजोरी सीधे तौर पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व के उस फैसले का असर है, जिसके तहत पॉलिसी दरों को 3.75%-4% के दायरे में पहुंचा दिया गया है।\n\n### मार्केट पर दबाव की वजहें\n\nफेडरल रिजर्व के रुख से साफ है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची बनी रहेंगी। 18 में से 16 फेड अधिकारियों ने साल के अंत तक कम से कम एक और बार दरें बढ़ाने का संकेत दिया है। इस सख्ती के कारण अमेरिकी डॉलर मजबूत हो रहा है और ट्रेजरी यील्ड्स ऊपर जा रही हैं, जिससे भारत जैसे उभरते बाजारों से ग्लोबल कैपिटल के बाहर जाने का खतरा बढ़ गया है।\n\nइसके अलावा, देश के भीतर बढ़ती महंगाई भी चिंता का विषय है। भारत में अगस्त महीने में कंज्यूमर प्राइस इन्फ्लेशन बढ़कर 4.82% पर पहुंच गई है, जो जुलाई में 4.45% थी। इस स्थिति ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के सामने मौद्रिक नीति को लेकर चुनौती खड़ी कर दी है।\n\n### सेक्टर पर क्या होगा असर?\n\nअमेरिकी बॉन्ड यील्ड का 5% के स्तर को पार करना बैंकिंग, रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर के लिए बड़ा जोखिम है। इन क्षेत्रों को विस्तार और कंज्यूमर फाइनेंसिंग के लिए कर्ज पर निर्भर रहना पड़ता है, और उधार की महंगी लागत कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर चोट कर सकती है।\n\nहालांकि, निवेशकों के लिए एक राहत की खबर है। ब्रेंट क्रूड ऑयल के दाम गिरकर $104.7 प्रति बैरल के आसपास आ गए हैं। कच्चे तेल में आई यह कमी भारत के ट्रेड बैलेंस और महंगाई को नियंत्रित करने में कुछ हद तक मदद कर सकती है, हालांकि कीमतों का अभी भी ऊंचा बने रहना भारतीय कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती है। अब मार्केट की नजर US Dollar Index और विदेशी निवेश (FPI) के आंकड़ों पर टिकी रहेगी।
