Indian Markets: ग्लोबल मार्केट की सुस्ती से दबाव में बाजार, सुस्त शुरुआत के संकेत

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Indian Markets: ग्लोबल मार्केट की सुस्ती से दबाव में बाजार, सुस्त शुरुआत के संकेत

आज भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सुस्त रहने के आसार हैं। ग्लोबल मार्केट में अनिश्चितता और बढ़ती एनर्जी कॉस्ट ने निवेशकों का सेंटिमेंट बिगाड़ दिया है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल ने बाजार पर दबाव बना रखा है, वहीं अब निवेशकों की नजरें सितंबर तिमाही के नतीजों पर टिकी हैं।

भारतीय शेयर बाजार आज एक रक्षात्मक (defensive) शुरुआत की तैयारी कर रहे हैं। Sensex और Nifty लगातार तीन सत्रों से गिरावट का सामना कर रहे हैं, जिसके पीछे मुख्य कारण विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की बिकवाली और विदेशी बाजारों से मिल रहे चुनौतीपूर्ण संकेत हैं।

ग्लोबल दबाव और विदेशी बिकवाली

बाजार में फिलहाल जो सतर्कता है, उसके पीछे ग्लोबल इकोनॉमिक फैक्टर्स अहम हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $106 से $107 प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, ऐसे में तेल की ऊंची कीमतें महंगाई और कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर दबाव का बड़ा कारण बन रही हैं।

इसके अलावा, अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड का 5.24% के करीब होना ग्लोबल फंड्स की चाल को प्रभावित कर रहा है। जब अमेरिकी बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो विदेशी निवेशक सुरक्षित एसेट्स की ओर रुख करते हैं, जिससे भारत जैसे इमर्जिंग मार्केट्स में निवेश कम हो जाता है। यही ट्रेंड हालिया ट्रेडिंग सेशंस में भी दिखा है, जहां FIIs नेट सेलर बने हुए हैं। तकनीकी रूप से भी Nifty 50 अपने प्रमुख मूविंग एवरेज के नीचे ट्रेड कर रहा है, जो शॉर्ट-टर्म ट्रेंड के सतर्क होने का संकेत है।

अर्निंग सीजन पर टिकी नजरें

बाजार की नजरें अब धीरे-धीरे 30 सितंबर, 2026 को समाप्त होने वाली तिमाही के अर्निंग सीजन पर शिफ्ट हो रही हैं। यह निवेशकों के लिए बेहद अहम समय है क्योंकि इससे पता चलेगा कि कंपनियों ने पिछले तीन महीनों में बढ़ती लागत और डिमांड के बीच खुद को कैसे मैनेज किया है।

इसकी शुरुआत के संकेत अभी से दिखने लगे हैं। EIH Limited और Greaves Cotton जैसी कंपनियों ने अपने इनसाइडर्स के लिए ट्रेडिंग विंडो बंद करने का ऐलान कर दिया है। यह नतीजों के ऐलान से पहले की एक मानक रेगुलेटरी प्रक्रिया है। उम्मीद है कि जल्द ही बाजार में कॉर्पोरेट प्रदर्शन की बाढ़ आएगी, जो स्टॉक की दिशा तय करेगी। निवेशक अब बारीकी से देखेंगे कि क्या कंपनियां बढ़ती एनर्जी कॉस्ट के बावजूद मुनाफे को बचा पाती हैं या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.