ग्लोबल मार्केट में टेक शेयरों की धुलाई और क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल का असर भारतीय बाजार पर साफ दिख रहा है। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) का सपोर्ट जारी है, लेकिन विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली और अमेरिका में रेट हाइक की आशंकाओं ने बाजार की वोलेटिलिटी बढ़ा दी है।
भारतीय शेयर बाजार इस समय बाहरी दबावों के बीच फंसा हुआ है। एक तरफ ग्लोबल टेक कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट है, तो दूसरी तरफ बढ़ती एनर्जी कॉस्ट ने निवेशकों की धड़कनें तेज कर दी हैं।\n\n### टेक दिग्गजों का बुरा हाल\nग्लोबल मार्केट में Alphabet और Intel के नतीजों ने मार्केट को निराश किया है। AI इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी खर्च की चिंता में Alphabet के शेयरों में 12.6% की गिरावट आई, जबकि Intel के कमजोर रेवेन्यू फोरकास्ट के चलते उसके शेयर 23% तक टूट गए। इस गिरावट का असर टेक-हैवी मार्केट्स पर साफ नजर आ रहा है।\n\n### कच्चे तेल की आग\nभारत के लिए एनर्जी की कीमतें चिंता का सबब बनी हुई हैं। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण WTI क्रूड $103 और ब्रेंट क्रूड $117 प्रति बैरल के आसपास मंडरा रहा है। भारत जैसे बड़े इंपोर्टर के लिए बढ़ती तेल की कीमतें न केवल रुपये पर दबाव डालती हैं, बल्कि कंपनियों की इनपुट कॉस्ट को भी बढ़ा देती हैं।\n\n### अमेरिका से मिले संकेत\nअमेरिकी इकॉनमी की 3.4% ग्रोथ और 3.6% एनुअल PCE इन्फ्लेशन ने फेड रिजर्व द्वारा ब्याज दरें कम करने की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। बाजार अब दिसंबर में रेट हाइक की 80% संभावना मानकर चल रहा है, जिससे इमर्जिंग मार्केट्स से विदेशी पूंजी बाहर जाने का डर बना हुआ है।\n\n### बाजार का हाल और लेवल्स\nघरेलू मोर्चे पर गुरुवार को DIIs ने ₹1,924 करोड़ की खरीदारी करके बाजार को संभालने की कोशिश की है, लेकिन FIIs की बिकवाली ने चिंता बढ़ा दी है। तकनीकी रूप से Nifty 50 के लिए 23,200 का लेवल एक बड़ी रुकावट बना हुआ है। बाजार में मजबूती बनाए रखने के लिए इसे 23,000 के ऊपर टिके रहना जरूरी है।
