US-ईरान के नए प्रतिबंधों के साये में भारतीय बाजार में दबाव, शेयर गिरे

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
US-ईरान के नए प्रतिबंधों के साये में भारतीय बाजार में दबाव, शेयर गिरे

अमेरिकी राष्ट्रपति ईरान पर नए और कड़े प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहे हैं, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और भू-राजनीतिक चिंताएं बढ़ गई हैं। इसका असर पिछले दो हफ्तों से भारतीय शेयर बाजारों पर दिख रहा है, जहां निवेशकों में घबराहट का माहौल है।

वैश्विक अनिश्चितता का असर

अमेरिका द्वारा ईरान पर नए और बेहद सख्त आर्थिक प्रतिबंधों की घोषणा की उम्मीद के चलते भारतीय शेयर बाजार लगातार दो हफ्तों से गिरावट दर्ज कर रहा है। निफ्टी 50 हालिया कारोबारी हफ्ते में 0.46% की गिरावट के साथ 24,252 के स्तर पर बंद हुआ। निवेशकों की यह सावधानी वैश्विक घटनाओं से जुड़ी अनिश्चितता को दर्शाती है।

कच्चे तेल और ऊर्जा बाजार पर संकट

बाजार की यह बेचैनी सीधे तौर पर ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी है। ईरान की स्थिति और अमेरिका की प्रतिक्रिया से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाले वैश्विक तेल व्यापार की सुरक्षा को लेकर डर बढ़ गया है। हालांकि, 24 अगस्त को मुनाफावसूली के चलते कच्चे तेल की कीमतों में मामूली गिरावट आई थी, लेकिन जोखिम अभी भी बना हुआ है। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात पर निर्भर है, इसलिए तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी चिंता का सबब है। ऊर्जा की बढ़ती लागत से देश का आयात बिल बढ़ेगा, जिससे रुपये पर दबाव पड़ेगा और महंगाई को बढ़ावा मिलेगा।

FII की बिकवाली और रुपये पर असर

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने हाल के दिनों में भारतीय शेयरों में ₹1,601 करोड़ की बिकवाली की है। इस बदले हुए सेंटीमेंट और वैश्विक कारकों के चलते भारतीय रुपये पर भी दबाव देखा जा रहा है, जो हाल ही में $1 के मुकाबले ₹95.43 पर बंद हुआ था। कमजोर रुपया, तेल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे आयात को भारतीय कंपनियों के लिए महंगा बनाता है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है।

सेक्टर-वार प्रदर्शन और निवेशकों की रणनीति

विभिन्न सेक्टर्स में बाजार का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। टेक्नोलॉजी और एफएमसीजी (FMCG) इंडेक्स में 2% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई, क्योंकि निवेशकों ने वैश्विक मांग और लागत दबाव के प्रति संवेदनशील सेक्टर्स से अपनी हिस्सेदारी कम कर दी। इसके विपरीत, मेटल और रियल एस्टेट सेक्टर्स में करीब 2% की तेजी देखी गई। यह अंतर दर्शाता है कि निवेशक पूरी तरह से बाजार से बाहर निकलने के बजाय बदलती भू-राजनीतिक स्थिति के अनुसार अपने पोर्टफोलियो का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं।

आगे चलकर, निवेशक इस बात पर नजर रखेंगे कि घोषित प्रतिबंध वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं को कैसे प्रभावित करते हैं और उसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में क्या उतार-चढ़ाव आता है। भारतीय रुपये की स्थिरता और FIIs के निवेश प्रवाह की निरंतरता भी महत्वपूर्ण संकेतक होंगे। भू-राजनीतिक घटनाओं की अप्रत्याशित प्रकृति को देखते हुए, बाजार प्रतिभागी संभावित रूप से ऊर्जा और विदेशी मुद्रा की अस्थिरता से जुड़ी परिचालन लागत में वृद्धि का प्रबंधन करने वाली घरेलू कंपनियों पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.