Indian Markets: तेल और इंडेक्स रीजॉइंट के बीच 13 अगस्त को गिरावट के साथ खुले बाजार

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Indian Markets: तेल और इंडेक्स रीजॉइंट के बीच 13 अगस्त को गिरावट के साथ खुले बाजार

13 अगस्त को भारतीय शेयर बाज़ार की शुरुआत नरम रहने की उम्मीद है, क्योंकि गिफ्ट निफ्टी (GIFT Nifty) एक गिरावट का संकेत दे रहा है। निवेशक कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और 24,500 के स्तर पर तकनीकी प्रतिरोध (technical resistance) पर कड़ी नजर रख रहे हैं। इस बीच, MSCI इंडिया इंडेक्स की नवीनतम समीक्षा पर भी बाज़ार की प्रतिक्रिया आ रही है, जिसमें कई प्रमुख शेयरों को शामिल और हटाया गया है।

मैक्रो Challenges और टेक्निकल रेजिस्टेंस (Technical Resistance)

निवेशकों के लिए सबसे बड़ी चिंता वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बनी हुई है, जो $88 से $90 प्रति बैरल के बीच मंडरा रही हैं। भारत जैसे देश के लिए, जो ऊर्जा आयात पर बहुत अधिक निर्भर है, लगातार उच्च तेल की कीमतें ट्रेड डेफिसिट (trade deficit) और महंगाई पर दबाव डाल सकती हैं। इसके अलावा, जुलाई के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) महंगाई दर 4.45% दर्ज की गई है, ऐसे में बाज़ार यह आकलन कर रहा है कि ये कारक केंद्रीय बैंक के भविष्य के ब्याज दरों के फैसलों को कैसे प्रभावित कर सकते हैं।

टेक्निकल (technical) दृष्टिकोण से, निफ्टी 50 (Nifty 50) 24,500 के स्तर के पास मजबूत बिकवाली के दबाव का सामना कर रहा है। ट्रेडर्स ने देखा है कि इस रेजिस्टेंस (resistance) स्तर पर कॉल ऑप्शन (call option) की भारी गतिविधि देखी गई है, जिससे अक्सर बिना महत्वपूर्ण सकारात्मक गति के इंडेक्स के लिए इसे पार करना मुश्किल हो जाता है। नतीजतन, बाज़ार प्रतिभागी नई पोजीशन लेने से पहले स्थिरता के संकेतों का इंतजार कर रहे हैं।

MSCI इंडेक्स समीक्षा का प्रभाव

मैक्रोइकॉनॉमिक (macroeconomic) रुझानों से परे, बाज़ार प्रतिभागी MSCI की नवीनतम अर्ध-वार्षिक समीक्षा पर गौर कर रहे हैं। इंडेक्स प्रदाता ने MSCI इंडिया स्टैंडर्ड इंडेक्स (MSCI India Standard Index) में बदलावों की घोषणा की है, जिससे पैसिव फंडों (passive funds) द्वारा अपनी होल्डिंग्स को समायोजित करने पर विशिष्ट शेयरों में महत्वपूर्ण इनफ्लो (inflows) या आउटफ्लो (outflows) हो सकते हैं। इस अपडेट में Adani Energy Solutions और Lenskart Solutions जैसे शेयरों को शामिल किया गया है। इसके विपरीत, Astral, Balkrishna Industries, और SBI Cards उन कंपनियों में शामिल हैं जिन्हें इंडेक्स से हटाया जा रहा है। इन विशिष्ट शेयरों में निवेशकों को ट्रेडिंग घंटों के दौरान बढ़ी हुई अस्थिरता (volatility) देखने को मिल सकती है, क्योंकि फंड इन नई वेटेज (weightings) के साथ अपने पोर्टफोलियो को संरेखित करते हैं।

संस्थागत फंड फ्लो (Institutional Fund Flows)

पिछले सत्र के आंकड़ों से संस्थागत भावना में एक विचलन (divergence) सामने आया है। जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 12 अगस्त को बाज़ार में ₹5,841 करोड़ का निवेश करके शुद्ध खरीदार (net buyers) रहे, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹1,000 करोड़ की इक्विटी (equities) बेचकर बिकवाली की तरफ रुख किया। यह रुझान बताता है कि जबकि घरेलू विश्वास स्थिर बना हुआ है, अंतर्राष्ट्रीय निवेशक वर्तमान में अधिक सतर्क हैं, जो समग्र सुस्त भावना में योगदान दे रहा है।

आगे बढ़ते हुए, निवेशकों के लिए मुख्य निगरानी योग्य वस्तुएं निफ्टी की अपनी वर्तमान सपोर्ट स्तरों को बनाए रखने की क्षमता और वैश्विक तेल की कीमतों का रुझान हैं। इसके अतिरिक्त, MSCI रीबैलेंसिंग से प्रभावित शेयरों में कोई भी अस्थिरता सत्र आगे बढ़ने के साथ देखने लायक महत्वपूर्ण कारक होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.