28 अगस्त, 2026 को भारतीय शेयर बाजार में रिकवरी के संकेत दिख रहे हैं। निवेशकों की निगाहें अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श के भाषण पर हैं, जो भविष्य में ब्याज दरों की दिशा तय कर सकते हैं।
भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 को संभलने की कोशिश कर रहे हैं। पिछले दो सत्रों की सुस्ती के बाद अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि क्या मार्केट 24,000 के अहम सपोर्ट लेवल को बचा पाएगा। गुरुवार को Nifty 50 0.48% गिरकर 24,090.85 पर और Sensex 0.70% फिसलकर 76,933.59 पर बंद हुआ था।
जैक्सन होल और फेडरल रिजर्व का रुख
आज बाजार की सबसे बड़ी हलचल 'जैक्सन होल' इकोनॉमिक सिम्पोजियम से आएगी। फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श का भाषण ग्लोबल मार्केट की चाल तय करेगा। उनके रुख से यह संकेत मिलेगा कि ब्याज दरों और महंगाई को लेकर केंद्रीय बैंक आगे क्या कदम उठा सकता है। किसी भी तरह की लिक्विडिटी या इंफ्लेशन से जुड़ी टिप्पणी भारतीय बाजारों में विदेशी निवेश के प्रवाह (Foreign Capital Flow) को सीधे प्रभावित करेगी।
घरेलू निवेशकों का दम
मार्केट का मूड देखें तो FII और DII की भूमिका अहम रही है। जहां पिछले सत्र में FIIs ने लगभग ₹298.26 करोड़ की बिकवाली की, वहीं DIIs ने ₹4,977.17 करोड़ की जबरदस्त खरीदारी कर बाजार को सहारा दिया। बैंकिंग, मेटल और सीमेंट सेक्टर में हालिया दबाव के बावजूद, डोमेस्टिक बाइंग का यह सहारा मार्केट को बड़ी गिरावट से बचाए हुए है।
आगे की राह
ग्लोबल स्तर पर गोल्ड की कीमतें $4,600 प्रति औंस के पास बनी हुई हैं। तकनीकी तौर पर, यदि Nifty 50 24,000 का स्तर नहीं बचा पाता है, तो इंडेक्स 23,600 से 23,800 के निचले स्तरों तक जा सकता है। अब सारा दारोमदार फेड की कमेंट्री और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी की ताकत पर निर्भर करेगा।
