एशियाई बाजारों में टेक्नोलॉजी शेयरों की रिकवरी के चलते भारतीय बाजार आज **30 सितंबर** को बढ़त के साथ शुरुआत कर सकते हैं। हालांकि, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली निवेशकों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स आज सुबह सकारात्मक नोट पर खुलने के लिए तैयार हैं, जिसका मुख्य कारण एशियाई बाजारों में आई रिकवरी है। GIFT Nifty के संकेत घरेलू बाजार में राहत की उम्मीद जगा रहे हैं, जिससे पिछले कई सत्रों से जारी गिरावट पर कुछ ब्रेक लग सकता है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर अस्थिरता अब भी बनी हुई है।
टेक रैली से मिली सपोर्ट
एशियाई बाजारों में सुधार दिख रहा है, जिसमें MSCI Asia Pacific Index में 0.4% की तेजी दर्ज की गई है। यह उछाल मुख्य रूप से टेक्नोलॉजी सेक्टर और सेमीकंडक्टर कंपनियों के बेहतर प्रदर्शन की बदौलत है। हालांकि, यह स्थिरता कितनी लंबी चलेगी, यह कहना मुश्किल है क्योंकि हाई इंटरेस्ट रेट्स को लेकर चिंताएं निवेशकों के मन में अभी भी बरकरार हैं।
US बॉन्ड यील्ड और FIIs का दबाव
भारतीय बाजारों के लिए सबसे बड़ी चुनौती अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का बढ़ना है। 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 5.293% और 30-वर्षीय यील्ड 5.6206% के स्तर पर पहुंच गई है, जो पिछले दो दशकों का उच्चतम स्तर है। इस कारण विदेशी निवेशक (FIIs) भारतीय बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित एसेट में निवेश कर रहे हैं। 29 सितंबर को विदेशी निवेशकों ने लगभग ₹10,000 करोड़ के शेयर बेचे, जो लगातार चौथा दिन था जब उन्होंने नेट बिकवाली की है। हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ₹7,000 करोड़ की खरीदारी कर बाजार को संभालने की कोशिश की है, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट में दबाव साफ दिख रहा है।
कच्चे तेल और जियोपॉलिटिक्स का साया
एनर्जी मार्केट पर भी निवेशकों की पैनी नजर है। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) USD 103.32 प्रति बैरल के ऊंचे स्तर पर कारोबार कर रहा है। मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव कच्चे तेल की कीमतों को अस्थिर कर रहा है, जो वैश्विक महंगाई के लिए बड़ा खतरा है। दिनभर बाजार में उतार-चढ़ाव रहने की पूरी उम्मीद है, जहां क्रूड की कीमतें और FIIs का रुख तय करेगा कि बाजार अपनी शुरुआती बढ़त को बरकरार रख पाएगा या नहीं।
