भारतीय शेयर बाज़ारों में लगातार तीसरे दिन गिरावट दर्ज की गई। 13 अगस्त 2026 को, बढ़ती महंगाई और ऊर्जा आपूर्ति की चिंताओं ने बाज़ार पर दबाव बनाया। होर्मुज जलडमरूमध्य में भू-राजनीतिक तनाव के कारण तेल की कीमतों में उछाल आया, जिससे निवेशकों के लिए महंगाई का अनुमान और जटिल हो गया। निफ्टी 24,395 पर आ गया।
बाज़ार में लगातार तीसरे दिन गिरावट
13 अगस्त 2026, गुरुवार को भारतीय शेयर बाज़ारों में लगातार तीसरे दिन गिरावट देखी गई। निवेशक घरेलू महंगाई के आंकड़ों और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच फंसे नजर आए। बेंचमार्क निफ्टी 24,395 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स में भी इंट्रा-डे उतार-चढ़ाव के बाद मामूली बढ़त दर्ज की गई।
ऊर्जा की बढ़ती कीमतें और महंगाई का डर
बाज़ार के लिए सबसे बड़ी चिंता ऊर्जा की बढ़ती लागत है। होर्मुज जलडमरूमध्य - जो कि एक महत्वपूर्ण वैश्विक तेल पारगमन बिंदु है - के आसपास बढ़ते तनाव ने आपूर्ति में बाधा की आशंकाओं को बढ़ा दिया है। ब्रेंट क्रूड की कीमतें लगभग $88 प्रति बैरल के आसपास मंडरा रही हैं, जिससे ऊर्जा आयात लागत में वृद्धि का जोखिम भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बना हुआ है। निवेशक इस बात से चिंतित हैं कि ऊर्जा की कीमतों में लगातार अस्थिरता आयातित महंगाई को बढ़ा सकती है, जिससे कंपनियों के मुनाफे और उपभोक्ता खर्च करने की क्षमता पर असर पड़ेगा।
महंगाई दर 4.45% के पार
चिंताजनक भावना को बढ़ाते हुए, जुलाई के लिए भारत की उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) महंगाई 4.45% दर्ज की गई। यह लगातार दूसरा महीना है जब महंगाई भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के 4% के लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है। जब महंगाई बढ़ी रहती है, तो ब्याज दरों में लंबे समय तक बढ़ोतरी की संभावना बढ़ जाती है, जिसका असर अक्सर बैंकिंग और वित्तीय शेयरों पर नकारात्मक पड़ता है। इसी का असर बैंक निफ्टी इंडेक्स पर भी ट्रेडिंग सत्र के दौरान देखा गया।
कुछ शेयरों में दिखी मजबूती
व्यापक कमजोरी के बावजूद, बाज़ार में कुछ कंपनियों के तिमाही नतीजों के कारण तेजी देखी गई। Tata Motors के शेयर कंपनी की नवीनतम तिमाही रिपोर्ट के बाद 6% तक चढ़ गए। इसी तरह, Solar Industries ने अपने राजस्व और मुनाफे में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज करने के बाद जोरदार तेजी दिखाई, जिसका मुख्य कारण रक्षा क्षेत्र की मांग थी। Astral ने भी मजबूत मुनाफा वृद्धि और मार्जिन विस्तार के आधार पर उल्लेखनीय बढ़त हासिल की। वहीं, प्रीमियम कंजम्पशन स्पेस में कमजोरी के संकेत मिले, जिसमें Page Industries को मुनाफे के मार्जिन में संकुचन के कारण गिरावट का सामना करना पड़ा।
रुपया भी दबाव में
भारतीय रुपया भी दबाव में दिखा, जो अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.43 के करीब कारोबार कर रहा था। रुपये की कमजोरी का मुख्य कारण आयातकों द्वारा डॉलर की उच्च मांग और महंगाई के आंकड़ों व वैश्विक तेल की कीमतों की चिंताओं के कारण सामान्य जोखिम-विरोधी भावना थी। कमजोर रुपया अक्सर घरेलू बाज़ार के लिए एक बाधा के रूप में कार्य करता है, खासकर उन कंपनियों के लिए जो आयात पर बहुत अधिक निर्भर करती हैं।
आगे क्या?
आगे चलकर, बाज़ार संभवतः भारत के थोक मूल्य सूचकांक (WPI), यूरोपीय संघ के GDP और अमेरिकी खुदरा बिक्री के आंकड़ों पर नज़र रखेगा। अशोक लेलैंड (Ashok Leyland), NMDC, एल्केम लेबोरेटरीज (Alkem Laboratories), और कोचीन शिपयार्ड (Cochin Shipyard) जैसी कंपनियों की कमाई की रिपोर्ट भी जारी होनी है। निवेशकों के लिए, निकट अवधि में कच्चे तेल की कीमतों की स्थिरता और मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक मोर्चे से कोई भी अपडेट सबसे महत्वपूर्ण निगरानी बिंदु बने रहेंगे।
