US Federal Reserve द्वारा **25 बेसिस पॉइंट** की ब्याज दरें बढ़ाए जाने के बावजूद भारतीय शेयर बाजार ने आज बढ़त के साथ शुरुआत की। जहाँ फाइनेंशियल और ऑटो शेयरों में खरीदारी देखी गई, वहीं IT सेक्टर पर दबाव साफ दिखा।
भारतीय बाजारों ने गुरुवार को एक सतर्क शुरुआत की, क्योंकि निवेशकों ने अमेरिकी फेडरल रिजर्व के 25 बेसिस पॉइंट ब्याज दर बढ़ाने के फैसले को पचाना शुरू कर दिया है। पिछले 3 सालों में यह पहली बार है जब दरों में बढ़ोतरी की गई है। शुरुआती कारोबार में Sensex 188 अंक और Nifty 81 अंक ऊपर रहा, जिसका मुख्य कारण फाइनेंशियल, ऑटो और PSU बैंक शेयरों में खरीदारी रही।
फेड का रुख और मार्केट पर असर
बाजार का सेंटीमेंट फेडरल रिजर्व के आने वाले रुख से थोड़ा प्रभावित है। 18 में से 16 नीति निर्माताओं ने साल के अंत तक कम से कम एक और बार दरें बढ़ने के संकेत दिए हैं। अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड अब 5% के करीब है, जो रिस्क-फ्री रिटर्न के लिए बेंचमार्क है। जब ये यील्ड ऊंचे स्तर पर होती हैं, तो ग्लोबल निवेशक इमर्जिंग मार्केट्स से पैसा निकालना शुरू कर देते हैं, जो भारतीय इक्विटी के लिए एक चुनौती है।
IT सेक्टर पर दबाव क्यों?
टेक्नोलॉजी शेयरों के लिए आज का दिन निराशाजनक रहा। HCL Technologies, Tata Consultancy Services, Infosys और Tech Mahindra जैसी कंपनियों के शेयरों में गिरावट देखी गई। इसकी बड़ी वजह अमेरिका में बढ़ती ब्याज दरें हैं, जिससे कंपनियों के टेक्नोलॉजी खर्च में कटौती होने का डर है।
मैक्रो इकोनॉमिक चुनौतियां
भारत के सामने फिलहाल कई चुनौतियां हैं। भारतीय रुपया (Rupee) अब 96 प्रति डॉलर के स्तर को छू चुका है, जिससे इंपोर्ट महंगा हो गया है। वहीं, ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) भी $105 प्रति बैरल के ऊपर बना हुआ है, जो महंगाई को बढ़ावा दे सकता है। साथ ही, विदेशी संस्थागत निवेशक (FIIs) लगातार बिकवाली कर रहे हैं और NSE IPO में निवेश के चलते मार्केट की लिक्विडिटी पर भी असर पड़ रहा है।
निवेशकों को अब Nifty के 23,000–23,080 के सपोर्ट जोन पर नजर रखनी चाहिए। मार्केट की आगे की चाल इस पर निर्भर करेगी कि घरेलू खरीदारी विदेशी बिकवाली को कितना संभाल पाती है।
