अक्टूबर की शुरुआत भारतीय बाजारों के लिए सुस्त रही है। US Bond Yield्स में उछाल और विदेशी निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली के चलते बाजार दबाव में हैं। जहां ऑटो सेक्टर के शेयरों में कमजोरी है, वहीं IT सेक्टर में कुछ हद तक स्थिरता देखी जा रही है।
अक्टूबर के पहले दिन भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बेहद कमजोर रही। सेंसेक्स और निफ्टी 50 दोनों ही इंडेक्स दबाव में दिखे। गौरतलब है कि सितंबर के महीने में निफ्टी 50 में 6.1% की गिरावट पहले ही देखी जा चुकी है, और अक्टूबर की शुरुआत भी उसी निराशाजनक ट्रेंड को आगे बढ़ा रही है।\n\n### दबाव की असली वजह: ग्लोबल सेंटीमेंट\nबाजार पर सबसे बड़ा असर ग्लोबल फाइनेंशियल कंडीशंस का है। अमेरिका के 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड (US 10-year Treasury yield) अब 5.3% के स्तर पर पहुंच गए हैं। जब सुरक्षित अमेरिकी बॉन्ड से ज्यादा रिटर्न मिलने लगता है, तो ग्लोबल इन्वेस्टर्स उभरते बाजारों (Emerging Markets) से पैसा निकालकर वहां लगाने लगते हैं। यही कारण है कि FIIs पिछले कई दिनों से लगातार बिकवाली कर रहे हैं। कई सत्रों में यह बिकवाली ₹10,000 करोड़ के आंकड़े को पार कर गई है, जिससे मार्केट में लिक्विडिटी की भारी कमी हो गई है और वोलेटिलिटी बढ़ गई है।\n\n### ऑटो सेक्टर बनाम IT सेक्टर\nआज के कारोबार में ऑटो सेक्टर और IT सेक्टर के बीच स्पष्ट बंटवारा दिखा। ऑटो कंपनियां धीमी मांग के दौर से गुजर रही हैं। Mahindra & Mahindra के शेयर आज 52-सप्ताह के निचले स्तर पर पहुंच गए। हालांकि कंपनी ने कुल सेल्स में 15% की ग्रोथ दिखाई है, लेकिन ट्रैक्टर सेल्स में गिरावट और पिछले साल के हाई बेस इफेक्ट के कारण बाजार ने इसे नकारात्मक लिया है। इसी तरह, Bajaj Auto ने डोमेस्टिक टू-व्हीलर सेल्स में 12% की गिरावट दर्ज की है, जिसके चलते स्टॉक में दबाव देखा गया।\n\nदूसरी ओर, IT सेक्टर में TCS और Infosys जैसे दिग्गज शेयरों ने मजबूती दिखाई है। निवेशक अब Accenture जैसे ग्लोबल दिग्गजों के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं, ताकि यह पता चल सके कि IT सर्विसेज पर खर्च का क्या हाल है।\n\nफिलहाल बाजार की नजरें निफ्टी के सपोर्ट लेवल्स पर टिकी हैं। अगर बाजार इन स्तरों को नहीं बचा पाया, तो आगे और गिरावट की संभावना बनी रहेगी।
