मंगलवार को भारतीय शेयर बाज़ारों में गिरावट का दौर देखा गया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स **493** अंकों की गिरावट के साथ बंद हुआ। अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेज़ी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच, टाटा संस (Tata Sons) ने **158** सालों में पहली बार अपनी एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) स्थगित कर दी।
बाज़ार पर गिरे ग्लोबल संकेतों के बादल
मंगलवार को शेयर बाज़ार में चौतरफा बिकवाली हावी रही, जिससे निवेशकों की धारणा (sentiment) पर असर पड़ा। BSE सेंसेक्स 493 अंक नीचे बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 भी 24,200 के स्तर से नीचे आ गया। आईटी (IT) और रियलिटी (Realty) जैसे प्रमुख सेक्टर्स में आई गिरावट ने बाज़ार की इस नरमी को और हवा दी।
$91 के पार पहुंचा कच्चा तेल, बढ़ी महंगाई की चिंता
बाज़ार में गिरावट की एक बड़ी वजह रही कच्चे तेल की कीमतों में उछाल। ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) की कीमतें $91 प्रति बैरल के पार निकल गईं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव (geopolitical tensions) ने तेल की सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। बढ़ती ऊर्जा कीमतें भारत जैसे देश के लिए महंगाई (inflation) और आयात बिल (import bill) को बढ़ा सकती हैं, जिसका सीधा असर रुपए और कंपनियों के मुनाफे पर पड़ सकता है। इसके अलावा, अमेरिका में बॉन्ड यील्ड (bond yields) में तेज़ी ने भी विदेशी निवेशकों की बिकवाली को बढ़ावा दिया है।
158 साल में पहली बार Tata Sons की AGM स्थगित
कॉर्पोरेट जगत से एक अभूतपूर्व खबर आई, जहां टाटा संस (Tata Sons) को अपनी 108वीं एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) को स्थगित करना पड़ा। 158 सालों के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है। मीटिंग में कोरम (quorum) पूरा न होने के कारण इसे स्थगित किया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, सर रतन टाटा ट्रस्ट (Sir Ratan Tata Trust) के एक संयुक्त प्रतिनिधि की अनुपस्थिति इसका कारण बनी, जो वर्तमान में कुछ नियामक प्रतिबंधों (regulatory restrictions) का सामना कर रहा है। इस घटना ने बड़े बिज़नेस समूहों में कॉर्पोरेट गवर्नेंस (corporate governance) और ट्रस्ट स्ट्रक्चर (trust structures) की जटिलताओं पर ध्यान खींचा है।
संस्थागत निवेशकों ने की खरीदारी
बाज़ार में गिरावट के बावजूद, संस्थागत निवेशकों (institutional investors) ने खरीदारी जारी रखी। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने जहां ₹1,650 करोड़ से ज़्यादा की खरीदारी की, वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी ₹2,579 करोड़ लगाए। यह दर्शाता है कि बाहरी दबावों के बावजूद, बड़े निवेशक भारतीय बाज़ारों में निवेश करने के मौके तलाश रहे हैं।
FDI नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी
सरकार विदेशी निवेश (FDI) को आकर्षित करने के लिए फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) के नियमों में बड़े बदलाव करने की तैयारी कर रही है। कहा जा रहा है कि कैबिनेट नोट (Cabinet note) जल्द ही पेश किया जा सकता है, जिसका मकसद निवेश प्रक्रियाओं को सरल बनाना है। अगर यह सफल होता है, तो इससे देश में और अधिक विदेशी पूंजी आ सकती है।
आगे क्या?
आगे चलकर निवेशकों की नज़रें मध्य-पूर्व (Middle East) की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतों पर रहेंगी। इसके अलावा, टाटा संस (Tata Sons) के गवर्नेंस स्ट्रक्चर (governance structure) से जुड़े अपडेट्स और FDI नियमों में होने वाले बदलावों पर भी बाज़ार की नज़रें रहेंगी। तकनीकी तौर पर, निफ्टी 50 के लिए 24,000 के स्तर को बनाए रखना अहम होगा।
