भारतीय शेयर बाज़ार में 7 दिन की गिरावट थमी, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड से मिली राहत

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
भारतीय शेयर बाज़ार में 7 दिन की गिरावट थमी, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड से मिली राहत

20 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाज़ारों ने लगातार सात दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ा। अमेरिकी ट्रेजरी की बॉन्ड यील्ड कम करने के उपायों से बाज़ार को सहारा मिला। हालांकि, निवेशक अभी भी ऊंचे तेल की कीमतों और रिकॉर्ड विदेशी फंड की निकासी पर नज़र बनाए हुए हैं, जो बाज़ार की स्थिरता को प्रभावित कर रहे हैं।

बाज़ार में लौटी रौनक

20 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाज़ारों में फिर से रौनक लौट आई, जिससे लगातार सात दिनों की गिरावट का अंत हुआ। यह पिछले 11 महीनों में Nifty 50 और BSE Sensex के लिए सबसे लंबी गिरावट की अवधि थी। बाज़ार में यह रिकवरी ग्लोबल बॉन्ड मार्केट्स में आई स्थिरता के कारण संभव हुई, खासकर अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा लॉन्ग-ड्यूरेशन डेट की बायबैक बढ़ाने के फैसले के बाद। इस कदम से बॉरोइंग कॉस्ट को लेकर वैश्विक चिंताएं कम हुईं, जिससे इक्विटी इंडेक्स को कुछ हद तक ठीक होने का मौका मिला।

आगे की राह मुश्किल?

इस सकारात्मक दिन के बावजूद, आगे का रास्ता अभी भी जटिल बना हुआ है। भारतीय बाज़ार वर्तमान में कई बड़ी संरचनात्मक चुनौतियों का सामना कर रहा है, जो सतर्क रहने का संकेत देते हैं। फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) 2026 के दौरान लगातार नेट सेलर रहे हैं, जिन्होंने भारतीय इक्विटी से रिकॉर्ड $24.7 बिलियन निकाले हैं। बिकवाली के इस लगातार दबाव को बाज़ार की हालिया कमजोरी का एक प्रमुख कारण माना जा रहा है, और निवेशक आने वाले दिनों में FIIs की गतिविधि पर करीब से नज़र रखेंगे कि क्या यह ट्रेंड जारी रहता है या पलटता है।

कच्चे तेल का बढ़ता खतरा

ऊर्जा की कीमतें एक और जोखिम का क्षेत्र हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $92 प्रति बैरल के करीब बनी हुई हैं। चूँकि भारत कच्चे तेल के आयात पर बहुत अधिक निर्भर है, इसलिए ऊर्जा की ऊंची लागत से महंगाई बढ़ सकती है और कॉर्पोरेट मुनाफे पर दबाव पड़ सकता है, खासकर उन सेक्टर्स के लिए जो तेल को अपने मुख्य इनपुट के रूप में उपयोग करते हैं। इसके अतिरिक्त, मध्य पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव अनिश्चितता का एक स्रोत बने हुए हैं, जो वैश्विक और घरेलू बाज़ार की भावनाओं को प्रभावित कर रहे हैं।

टेक्निकल लेवल्स पर खास नजर

टेक्निकल नज़रिए से, बाज़ार के विशेषज्ञ इस मौजूदा उछाल की स्थिरता का आकलन करने के लिए विशिष्ट स्तरों पर नज़र रख रहे हैं। Nifty 50 के लिए, 24,000 का स्तर सपोर्ट के तौर पर देखा जा रहा है, जबकि 24,300 को तत्काल हर्डल माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि इन स्तरों को बनाए रखने या पार करने की बाज़ार की क्षमता अल्पावधि के ट्रेंड की मजबूती को निर्धारित करेगी।

निवेशक दैनिक FII फ्लो डेटा, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक स्थिरता से संबंधित किसी भी नए अपडेट पर नज़र रखेंगे। हालांकि आज बाज़ार को अस्थायी राहत मिली है, लेकिन ये व्यापक कारक आने वाले सत्रों में इंडेक्स की दिशा निर्धारित करने की संभावना रखते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.