Indian Markets: कमजोरी के संकेत, FIIs की बिकवाली और कच्चे तेल का बढ़ता भाव

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Indian Markets: कमजोरी के संकेत, FIIs की बिकवाली और कच्चे तेल का बढ़ता भाव

गुरुवार को भारतीय शेयर बाज़ारों में सुस्त शुरुआत की उम्मीद है, क्योंकि GIFT Nifty कमजोरी का इशारा कर रहा है। अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों से थोड़ी राहत मिली है, लेकिन निवेशक भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को संस्थागत निवेशकों के बीच चल रहे खरीद-बिक्री के खेल के बीच परख रहे हैं।

बाज़ार में कमजोरी के आसार

गुरुवार, 13 अगस्त 2026 को भारतीय शेयर बाज़ारों में एक मिली-जुली या नकारात्मक शुरुआत देखने को मिल सकती है। GIFT Nifty के शुरुआती संकेतों के अनुसार, घरेलू सूचकांकों को ट्रेडिंग सत्र की शुरुआत में गति बनाए रखने में संघर्ष करना पड़ सकता है, भले ही प्रमुख एशियाई बाज़ारों में अधिकतर सकारात्मक रुझान देखने को मिल रहा है।

वैश्विक संकेतों का असर

निवेशक इस समय घरेलू और वैश्विक, दोनों स्रोतों से मिले मिले-जुले संकेतों को संतुलित कर रहे हैं। वैश्विक स्तर पर, जुलाई के लिए अमेरिकी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index) में 0.1% की वृद्धि दर्ज की गई, जो बाज़ार की उम्मीदों के अनुरूप है। इस विकास से कुछ राहत मिली है, क्योंकि यह बताता है कि फेडरल रिज़र्व को निकट भविष्य में ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव महसूस नहीं हो सकता है। इस भावना ने कई एशियाई बाज़ारों में टेक्नोलॉजी शेयरों को बढ़ावा दिया है।

घरेलू चिंताएं हावी

हालांकि, इन सकारात्मक संकेतों पर घरेलू चिंताओं का असर भारी पड़ रहा है। कच्चे तेल की कीमतें, जिनका भारत के आयात बिल और मुद्रास्फीति पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है, $90 प्रति बैरल के करीब बनी हुई हैं। मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव संभावित आपूर्ति बाधाओं के डर को बढ़ा रहे हैं, जो घरेलू बाज़ार के लिए एक बड़ी बाधा साबित हो रहे हैं।

संस्थागत निवेशकों की चाल

बाज़ार पर्यवेक्षकों के लिए एक और महत्वपूर्ण बात संस्थागत निवेशकों की अलग-अलग गतिविधियाँ हैं। पिछले सत्र (12 अगस्त) के दौरान, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ₹1,002.5 करोड़ की इक्विटी बेचकर शुद्ध बिकवाली दर्ज की। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने इस आपूर्ति को सक्रिय रूप से खरीदा है, और ₹5,841.66 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की है। घरेलू फंडों का यह लगातार समर्थन वर्तमान में बाज़ार में बड़ी गिरावट को रोकने के लिए एक बफर का काम कर रहा है।

तकनीकी स्तरों पर नज़र

तकनीकी रूप से, Nifty 50 इंडेक्स एक कठिन चुनौती का सामना कर रहा है। विश्लेषकों ने बताया है कि 24,500 का स्तर एक महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस ज़ोन के रूप में कार्य कर रहा है, जहाँ हाल ही में बाज़ार ने भारी बिकवाली दबाव का सामना किया है। निवेशकों के लिए, आने वाले सत्रों में मुख्य निगरानी यह होगी कि क्या इंडेक्स इस 24,500 के स्तर को निर्णायक रूप से पार कर पाता है, या वर्तमान सावधानी से आगे समेकन (Consolidation) होता है। बाज़ार सहभागियों की नज़र दैनिक संस्थागत प्रवाह पर भी रहेगी कि क्या घरेलू खरीद की ताकत विदेशी बिकवाली के दबाव का मुकाबला कर पाती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.