ग्लोबल मार्केट से मिले खराब संकेतों के कारण भारतीय शेयर बाजार में सुनामी जैसी स्थिति है। बाजार ने लगातार आठवें हफ्ते गिरावट दर्ज की है, जो साल 2001 के बाद सबसे लंबा सिलसिला है। Nifty 50 अपने 2026 के पीक से **15%** नीचे आ चुका है।
बाजार में हाहाकार क्यों?
भारतीय शेयर बाजार के लिए यह दौर काफी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। बीते हफ्ते के अंत तक Nifty 50 में 3.1% और Sensex में 2.7% की गिरावट देखी गई। इस बिकवाली की सबसे बड़ी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की तरफ से हो रही भारी निकासी है। साल 2026 में अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से $27.8 बिलियन की रिकॉर्ड रकम निकाली है। इसका मुख्य कारण अमेरिका की 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड का 5.34% तक पहुंचना है। जब सुरक्षित अमेरिकी बॉन्ड्स पर ज्यादा रिटर्न मिलता है, तो ग्लोबल निवेशक भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर वहां शिफ्ट कर रहे हैं।
इसके अलावा, क्रूड ऑयल की कीमतें $100 प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं, जो देश के इंपोर्ट बिल को बढ़ाकर कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन पर चोट कर रही हैं।
क्या है मार्केट की स्थिति?
बाजार की कमजोरी किसी एक सेक्टर तक सीमित नहीं है। आंकड़ों के मुताबिक, Nifty 500 के लगभग 81% शेयर अपने 50 दिनों के औसत प्राइस से नीचे ट्रेड कर रहे हैं। यह साफ दिखाता है कि गिरावट का दायरा काफी बड़ा है और निवेशक वैल्यूएशन को लेकर सतर्क हो गए हैं।
अब आगे क्या?
निवेशकों की नजरें अब 7 अक्टूबर से शुरू होने वाली RBI की मौद्रिक नीति समिति की बैठक पर टिकी हैं। बाजार को उम्मीद है कि केंद्रीय बैंक रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी कर सकता है, जिससे यह 5.50% तक पहुंच जाएगा। अगर ऐसा होता है, तो कर्ज महंगा होगा जिसका सीधा असर रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर पड़ सकता है।
पॉलिसी मीटिंग के बाद 8 अक्टूबर से सितंबर तिमाही के नतीजों (Earnings Season) की शुरुआत हो रही है, जिसमें Tata Consultancy Services सबसे पहले अपने आंकड़े पेश करेगी। अब बाजार का ध्यान पुरानी परफॉर्मेंस के बजाय कंपनियों के फ्यूचर गाइडेंस पर रहेगा।
