8 सितंबर को भारतीय शेयर बाजार में सुस्त शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। Brent Crude की कीमतें **$97** प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते सप्लाई चेन पर संकट गहरा गया है, जिससे निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं।
भारतीय इक्विटी मार्केट के लिए आज, 8 सितंबर, 2026, की शुरुआत थोड़ी नरम रहने के आसार हैं। GIFT Nifty के संकेत बता रहे हैं कि डोमेस्टिक एक्सचेंजों पर निवेशकों का मूड काफी सतर्क है। इस कमजोरी की मुख्य वजह ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों का उछलकर $97 प्रति बैरल के स्तर को पार करना है।
तेल का तनाव और इकोनॉमी पर असर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने तेल की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम रास्तों से तेल की आवाजाही पर संकट के डर से एनर्जी मार्केट में उथल-पुथल मची है। भारत दुनिया का एक बड़ा तेल आयातक देश है, ऐसे में तेल का भाव $100 के करीब पहुंचना हमारी अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा रिस्क है। इससे न केवल देश का इंपोर्ट बिल बढ़ेगा, बल्कि रुपये पर दबाव और महंगाई बढ़ने का खतरा भी बना रहेगा।
कॉरपोरेट मुनाफे पर संकट
निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता एविएशन, पेंट्स, केमिकल और टायर जैसे सेक्टर को लेकर है। इन कंपनियों के लिए कच्चा माल और फ्यूल महंगा होने से उनके प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर पड़ सकता है। अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो कंपनियों को या तो लागत खुद झेलनी होगी या फिर कीमतें बढ़ाकर ग्राहकों पर बोझ डालना होगा, जिससे मांग कम हो सकती है।
मार्केट का टेक्निकल आउटलुक
बाजार में एक मजबूती यह भी है कि कल के कारोबारी सत्र में Nifty और Sensex 0.50% टूटने के बावजूद, विदेशी निवेशकों (FIIs) ने ₹280 करोड़ और घरेलू निवेशकों (DIIs) ने ₹566 करोड़ की खरीदारी की है। हालांकि, टेक्निकल तौर पर Nifty 50 को 24,000 के स्तर के नीचे कड़ा रेजिस्टेंस मिल रहा है। अब निवेशकों की नजर 23,700 से 23,750 के सपोर्ट लेवल पर टिकी है। यदि बाजार इस रेंज को होल्ड नहीं कर पाया, तो बिकवाली और बढ़ सकती है।
