बाजार में गिरावट का सिलसिला जारी है और एडवांस-टू-डिक्लाइन रेशियो फिसलकर **0.89** पर आ गया है, जो मार्च के बाद से सबसे खराब स्थिति है। हालांकि कंपनियों का मुनाफा **27%** बढ़ा है, लेकिन क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें और FPI की बिकवाली ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
भारतीय शेयर बाजार में इंडेक्स के प्रदर्शन और मिड-स्मॉल कैप शेयरों के बीच एक बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। अक्टूबर के डेटा के अनुसार, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर 2,709 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जबकि केवल 2,399 शेयर ही बढ़त के साथ बंद हुए। यह आंकड़ा बताता है कि मार्केट की व्यापक स्थिति दबाव में है।
कॉरपोरेट नतीजों और सेंटीमेंट में दूरी
एक ओर जहां 356 कंपनियों का सैंपल यह दिखाता है कि सितंबर तिमाही में इनका नेट प्रॉफिट 27% बढ़ा है, वहीं दूसरी ओर निवेशक मैक्रो-इकोनॉमिक चिंताओं के कारण सतर्क बने हुए हैं। फिलहाल बाजार व्यक्तिगत कंपनियों के नतीजों के बजाय वैश्विक संकेतों को अधिक प्राथमिकता दे रहा है।
बाजार पर मंडराते खतरे
- क्रूड ऑयल: ब्रेंट क्रूड की कीमतें $115 प्रति बैरल के करीब बनी हुई हैं, जो भारतीय मैन्युफैक्चरर्स के लिए इनपुट कॉस्ट को बढ़ा रही हैं।
- विदेशी बिकवाली: इस साल विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारत से करीब $31 बिलियन की निकासी की है।
- US बॉन्ड यील्ड: अमेरिका की 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड का 5% के आसपास स्थिर रहना ग्लोबल निवेशकों को भारतीय शेयरों से दूर सुरक्षित विकल्पों की ओर आकर्षित कर रहा है।
इतिहास गवाह है कि जब भी एडवांस-टू-डिक्लाइन रेशियो 1 के नीचे आता है, बेंचमार्क Sensex के लिए अपनी तेजी बरकरार रखना मुश्किल हो जाता है। जानकारों का मानना है कि अगर क्रूड ऑयल के दाम $90 से $95 के दायरे में आते हैं, तो बाजार के सेंटीमेंट में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है।
