Indian Liquor Sector: सरकारी खजाने में बहे ₹4 लाख करोड़, प्रीमियम शराब से बढ़ रहा कंपनियों का मुनाफा

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Indian Liquor Sector: सरकारी खजाने में बहे ₹4 लाख करोड़, प्रीमियम शराब से बढ़ रहा कंपनियों का मुनाफा

भारत का शराब उद्योग सरकारी राजस्व का एक बड़ा हिस्सा बन चुका है। फाइनेंशियल ईयर 2025 में इस सेक्टर ने राज्यों के टैक्स कलेक्शन में **₹4 लाख करोड़** का योगदान दिया है, जो उनके कुल रेवेन्यू का **19%** है। अब कंपनियां वॉल्यूम के बजाय प्रीमियम प्रोडक्ट्स पर फोकस कर रही हैं, जो सीधे उनके मार्जिन को फायदा पहुंचा रहा है।

शराब का कारोबार अब राज्य सरकारों के लिए कमाई का सबसे बड़ा जरिया बन गया है। फाइनेंशियल ईयर 2024-25 के दौरान इस सेक्टर ने राज्यों को ₹4 लाख करोड़ का टैक्स दिया है। तेलंगाना, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों का बजट तो इस सेक्टर पर काफी हद तक निर्भर है, यही कारण है कि इन राज्यों में पॉलिसी में कोई भी बदलाव मार्केट को हिला देता है।

प्रीमियम सेगमेंट से बढ़ रही चमक

सेक्टर में अब 'प्रीमियमाइजेशन' का दौर है। लोग सस्ती शराब के बजाय प्रीमियम ब्रांड्स की ओर रुख कर रहे हैं। डेटा के मुताबिक, 2022 से 2025 के बीच प्रीमियम सेगमेंट में 10.2% की CAGR ग्रोथ देखी गई है, जबकि बजट और रेगुलर कैटेगरी की ग्रोथ महज 1.1% से 1.4% के बीच रही है।

इसका सीधा फायदा United Spirits, Radico Khaitan और Allied Blenders जैसी कंपनियों को हो रहा है। कंपनियां अब टायर-1 शहरों से हटकर टायर-2 शहरों में अपना प्रीमियम पोर्टफोलियो विस्तार कर रही हैं, ताकि मार्जिन को बेहतर बनाए रखा जा सके।

निवेशकों के लिए चेतावनी

ICRA ने इस साल बड़ी कंपनियों के रेवेन्यू में 10-12% की ग्रोथ का अनुमान लगाया है, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं। सबसे बड़ा रिस्क है 'रेगुलेटरी अनिश्चितता'। भारत में शराब पर कोई एक नेशनल पॉलिसी नहीं है, हर राज्य के अपने एक्साइज नियम और टैक्स हैं, जो बिजनेस के लिए जटिलता पैदा करते हैं। इसके अलावा, कांच और अनाज जैसी कच्ची सामग्री (Raw Materials) की बढ़ती कीमतें भी मुनाफे पर दबाव डाल सकती हैं। ऐसे में निवेशकों को सरकारी नीति और कंपनी के मार्जिन मैनेजमेंट पर बारीक नजर रखनी चाहिए।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.