Home Credit India की एक ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय परिवार अब फिजूलखर्ची छोड़कर लंबे समय के लिए संपत्ति (एसेट) बनाने पर ध्यान दे रहे हैं। अब **31%** लोगों का मुख्य लक्ष्य घर खरीदना बन गया है, जिसमें Gen Z अपनी बचत की आदतों से आगे निकल रही है।
भारत के कंज्यूमर बिहेवियर में साल 2026 में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। 'Great Indian Wallet 2026' की रिपोर्ट बताती है कि आम परिवार अब लाइफस्टाइल अपग्रेड्स की जगह घर या बिजनेस के उपकरण जैसे फिजिकल एसेट खरीदने को तरजीह दे रहे हैं।
फाइनेंशियल वेल-बीइंग में सुधार
बाजार का सेंटीमेंट बेहतर हुआ है, जिसका सबूत है फाइनेंशियल वेल-बीइंग इंडेक्स का 34 से बढ़कर 40 पॉइंट्स पर पहुंचना। इसमें डिजिटल फाइनेंशियल टूल्स की बड़ी भूमिका है, जिसे 82% लोग अपना भविष्य सुरक्षित करने के लिए जरूरी मान रहे हैं।
घर का सपना और बढ़ता कर्ज
लोअर-मिडल क्लास के लिए घर खरीदना 5 साल का सबसे बड़ा लक्ष्य बन गया है। दिलचस्प बात यह है कि 31% लोग अब इस लक्ष्य के लिए कर्ज लेने से नहीं हिचकिचा रहे, जो पिछले साल के मुकाबले 8% ज्यादा है। यानी क्रेडिट का इस्तेमाल अब सिर्फ सर्वाइवल के लिए नहीं, बल्कि एसेट बनाने के लिए किया जा रहा है।
Gen Z बन रहे 'बचत के चैंपियन'
यंग जनरेशन यानी Gen Z को लेकर बनी धारणाएं टूट रही हैं। इस स्टडी में 58% Gen Z रिस्पॉन्डेंट्स ने अपनी सेविंग बढ़ने की बात कही है, जो बाकी उम्र के लोगों के मुकाबले कहीं बेहतर है।
जोखिम और चुनौतियां
हालांकि, तस्वीर का दूसरा पहलू यह भी है कि लोअर-मिडल क्लास की औसत मासिक आय अभी भी लगभग ₹35,000 के आसपास है। बजट बेहद तंग है और एंबिशन और इनकम के बीच एक बड़ा गैप पैदा हो गया है। अगर महंगाई दर बढ़ती है या आय में इजाफा नहीं होता, तो लंबी अवधि के कर्ज परिवारों के लिए फाइनेंशियल स्ट्रेस का कारण बन सकते हैं। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि क्या परिवार अपने लंबे समय के कर्ज और दैनिक खर्चों के बीच संतुलन बना पाएंगे।
