Stock Market Investment: भारतीय परिवारों का पैसा अब बैंक नहीं, शेयर बाजार में! FY25 में ₹6.91 लाख करोड़ का रिकॉर्ड निवेश

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
Stock Market Investment: भारतीय परिवारों का पैसा अब बैंक नहीं, शेयर बाजार में! FY25 में ₹6.91 लाख करोड़ का रिकॉर्ड निवेश

भारतीय परिवारों ने फाइनेंशियल ईयर 2025 में पारंपरिक बैंक डिपॉजिट्स से हटकर शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड्स की ओर रुख किया है। एक साल के भीतर रिकॉर्ड **₹6.91 लाख करोड़** का निवेश हुआ है, जो भारतीय बाजार के लिए एक बड़े बदलाव का संकेत है।

बाजार की ओर क्यों झुके निवेशक?

फाइनेंशियल ईयर 2025 में भारतीय परिवारों ने अपनी बचत को मैनेज करने के तरीके में बड़ा बदलाव किया है। पिछले साल के ₹3.58 लाख करोड़ के मुकाबले, इस साल यह आंकड़ा लगभग दोगुना होकर ₹6.91 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। यह साफ तौर पर दर्शाता है कि अब आम निवेशक बैंक बचत के बजाय ग्रोथ-ओरिएंटेड एसेट्स को तरजीह दे रहे हैं।

म्यूचुअल फंड्स का रहा दबदबा

इस रिकॉर्ड निवेश में सबसे बड़ी भूमिका म्यूचुअल फंड्स की रही, जिसमें ₹5.13 लाख करोड़ का ऐतिहासिक इनफ्लो देखा गया। रिटेल निवेशकों का भरोसा प्राइमरी मार्केट (IPO) पर भी काफी ज्यादा रहा, जहां उन्होंने ₹95,139 करोड़ का निवेश किया। हालांकि, सेकेंडरी मार्केट में निवेशकों ने सतर्कता बरती और ₹54,786 करोड़ का मुनाफावसूली (Profit booking) की, जो बाजार में उतार-चढ़ाव के दौरान उनकी समझदारी को दर्शाता है।

इकोनॉमी पर असर और जोखिम

यह बदलाव बैंकिंग सिस्टम के लिए एक चुनौती भी है, क्योंकि बैंक डिपॉजिट्स घटने से लोन के लिए लिक्विडिटी पर दबाव बढ़ सकता है। सबसे बड़ी बात यह है कि अब घरेलू संपत्ति सीधे तौर पर स्टॉक मार्केट के प्रदर्शन से जुड़ गई है। फिक्स्ड रिटर्न वाली डिपॉजिट्स के उलट, मार्केट-लिंक्ड एसेट्स में रिस्क ज्यादा होता है। हालांकि, घरेलू निवेशकों की यह सक्रियता विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली के दौरान बाजार को सहारा देने का काम कर रही है, लेकिन निवेशकों को अब मार्केट वैल्यूएशन और रिस्क मैनेजमेंट पर पहले से कहीं ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.