Household Savings: भारतीयों की बचत में भारी गिरावट, कर्ज का बोझ पहुंचा **49%** के रिकॉर्ड स्तर पर

ECONOMY
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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Household Savings: भारतीयों की बचत में भारी गिरावट, कर्ज का बोझ पहुंचा **49%** के रिकॉर्ड स्तर पर

देश के परिवारों की नेट फाइनेंशियल सेविंग्स गिरकर GDP का **6.2%** रह गई हैं, जबकि कर्ज का स्तर **49%** पर पहुंच गया है। रिटेल निवेशक अब बाजार से पैसा निकालकर सुरक्षित बैंक डिपॉजिट में डाल रहे हैं, जिसका सीधा असर मार्केट लिक्विडिटी पर दिख रहा है।

फाइनेंशियल ईयर 2026 के ताजा आंकड़े भारतीय परिवारों की बदलती आदतों की कहानी बयां कर रहे हैं। नेट फाइनेंशियल सेविंग्स गिरकर 6.2% पर आ गई हैं, जो पिछले साल 7% थीं। यह आंकड़ा 2010 से अब तक के 7.9% के लॉन्ग-टर्म औसत से काफी नीचे है। चिंता की बात यह है कि घर-घर बढ़ता कर्ज अब GDP के 49% तक पहुंच चुका है, जो उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के सामान्य स्तर 45% से कहीं ज्यादा है।

मार्केट पार्टिसिपेशन पर असर

बढ़ते कर्ज का असर सीधे स्टॉक मार्केट पर दिख रहा है। डिस्पोजेबल इनकम घटने की वजह से म्यूचुअल फंड और इक्विटी में निवेश 18% (FY25) से घटकर 13% (FY26) पर आ गया है। निवेशक अब शेयरों के बजाय कैश और बैंक डिपॉजिट जैसे सुरक्षित विकल्पों की ओर भाग रहे हैं, जिससे बाजार में रिटेल लिक्विडिटी के कम होने का खतरा पैदा हो गया है।

मैक्रोइकॉनॉमिक चुनौतियां

अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर भी दबाव बढ़ रहा है। मानसून में 15% की कमी ने खेती और रबी की फसल के लिए चिंता बढ़ा दी है। इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से महंगाई (Inflation) का दबाव बना हुआ है, जो कंपनियों के कंजम्पशन मार्जिन पर बुरा असर डाल सकता है।

RBI की अगली चाल क्या होगी?

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के सामने अब एक कठिन चुनौती है। लिक्विडिटी को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंक की ओर से 'हॉकिश' (Hawkish) रुख अपनाए जाने की चर्चा है। अगर RBI ब्याज दरों को ऊंचा रखता है, तो कंपनियों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाएगा। निवेशकों के लिए अब महंगाई के आंकड़े और RBI की अगली पॉलिसी कमेंट्री पर नजर रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि यही तय करेगा कि बाजार की चाल आगे कैसी होगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.