Indian Household Budgets: महंगाई की मार! घरेलू खर्च **₹56,000** के पार, FMCG सेक्टर में **2%** की गिरावट

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AuthorAditya Rao|Published at:
Indian Household Budgets: महंगाई की मार! घरेलू खर्च **₹56,000** के पार, FMCG सेक्टर में **2%** की गिरावट

भारतीय परिवारों का औसत तिमाही खर्च उछलकर **₹56,000** तक पहुंच गया है। बढ़ती जरूरतों के चलते लोग अब गैर-जरूरी खर्चों में कटौती कर रहे हैं, जिसका सीधा असर FMCG सेक्टर पर पड़ा है और वहां **2%** की वॉल्यूम गिरावट देखी गई है।

पिछले तीन सालों में भारतीय परिवारों की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। साल 2022 में जो खर्च लगभग ₹42,000 था, वह अब बढ़कर ₹56,000 के पार पहुंच गया है। घर का बजट बिगड़ने के कारण अब लोग शिक्षा, कर्ज की किस्तें (EMI) और हेल्थकेयर जैसे अनिवार्य खर्चों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जबकि रोजमर्रा की छोटी-मोटी खरीदारी और गैर-जरूरी चीजों पर लगाम लगाई जा रही है।

FMCG सेक्टर के लिए चुनौती

इस बदलते ट्रेंड का सबसे ज्यादा असर FMCG सेक्टर पर दिख रहा है। अप्रैल-जून 2026 की तिमाही में FMCG सेक्टर में वॉल्यूम ग्रोथ में 2% की साल-दर-साल गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 68% FMCG कैटेगरीज में नकारात्मक ग्रोथ देखने को मिल रही है। कंपनियों के सामने अब सबसे बड़ा संकट यह है कि वे कच्चे माल की बढ़ती कीमतों का बोझ ग्राहकों पर डालें या मार्जिन बचाए रखने के लिए खुद इसे झेलें।

प्रीमियम बनाम मास मार्केट

बाजार फिलहाल दो अलग-अलग दिशाओं में बढ़ रहा है। अमीर वर्ग अभी भी प्रीमियम प्रोडक्ट्स की तरफ झुका हुआ है, जबकि आम आदमी का बजट बिगड़ने के कारण कंपनियों को अब 'वैल्यू-फॉर-मनी' और छोटे पैक साइज़ पर फोकस करना पड़ रहा है।

कर्ज का बोझ और भविष्य की चिंता

सबसे चिंताजनक बात यह है कि वित्तीय वर्ष 2024 में परिवारों पर कर्ज का बोझ GDP का 6.4% तक पहुंच गया है, जो कि 17 सालों का उच्चतम स्तर है। इतना ज्यादा कर्ज होने के कारण छोटी सी भी आर्थिक हलचल परिवारों की खर्च करने की क्षमता को सीमित कर देती है। आने वाले समय में निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि क्या कंज्यूमर कंपनियां अपनी सेल्स वॉल्यूम में सुधार कर पाती हैं या उन्हें और अधिक रक्षात्मक (Defensive) रुख अपनाना पड़ेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.