Indian GCCs: महंगे टैलेंट से बचने के लिए कंपनियों का नया दांव, अपना रही हैं 'फ्रैक्शनल CXO' मॉडल

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
Indian GCCs: महंगे टैलेंट से बचने के लिए कंपनियों का नया दांव, अपना रही हैं 'फ्रैक्शनल CXO' मॉडल

भारत में मौजूद Global Capability Centres (GCCs) अब फुल-टाइम लीडरशिप के भारी खर्च से बचने के लिए 'फ्रैक्शनल' यानी पार्ट-टाइम एग्जीक्यूटिव्स को काम पर रख रहे हैं। यह रणनीति मिड-मार्केट फर्मों को लागत नियंत्रित करने में तो मदद कर रही है, लेकिन सेक्टर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा को भी दिखा रही है।

भारत में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) अपनी लीडरशिप टीम के गठन के तरीके को पूरी तरह बदल रहे हैं। एक फुल-टाइम इंडिया हेड को हायर करने की सालाना लागत अक्सर ₹40 लाख से ₹60 लाख के बीच होती है, जबकि AI या डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसे स्पेशलाइज्ड रोल्स के लिए यह पैकेज ₹3 करोड़ तक पहुंच जाता है। इतनी भारी सैलरी के चलते मिड-मार्केट कंपनियों के लिए ट्रेडिशनल हायरिंग मॉडल अब मुश्किल हो गया है।

क्या है 'फ्रैक्शनल' मॉडल का फंडा?

इस अंतर को पाटने के लिए कंपनियां 'फ्रैक्शनल' यानी पार्ट-टाइम CXO रोल की ओर बढ़ रही हैं। इस मॉडल के जरिए कंपनी किसी अनुभवी एग्जीक्यूटिव को एक विशेष प्रोजेक्ट या मिशन के लिए हायर करती है—जैसे कि नई यूनिट सेटअप करना, डिजिटल ट्रांजिशन मैनेज करना या किसी अस्थायी कंप्लायंस की समस्या सुलझाना। इससे कंपनी को फुल-टाइम सैलरी का भारी बोझ नहीं उठाना पड़ता।

क्यों बढ़ रही है इसकी मांग?

आंकड़े बताते हैं कि फाइनेंशियल ईयर 2024 में इस तरह की फ्रैक्शनल लीडरशिप की मांग में 68% का इजाफा हुआ है। भारत में अब 2,100 से ज्यादा GCCs मौजूद हैं, जिससे टॉप-टियर टैलेंट के लिए मार्केट में होड़ मची है। कंपनियां खर्च कम करने और एक्सपर्ट सलाह पाने के लिए इसे एक लचीले विकल्प के तौर पर देख रही हैं।

क्या हैं छिपे हुए जोखिम?

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह मॉडल छोटे या प्रोजेक्ट-बेस्ड काम के लिए तो अच्छा है, लेकिन बड़ी और स्थापित GCCs के लिए यह पर्याप्त नहीं है। एंटरप्राइज आर्किटेक्चर, डेटा सिक्योरिटी और लॉन्ग-टर्म टैलेंट स्ट्रैटेजी जैसे क्षेत्रों में फुल-टाइम प्रतिबद्धता की जरूरत होती है। एक्सपर्ट्स को डर है कि पार्ट-टाइम लीडरशिप से कंपनी के कल्चर और गवर्नेंस में गैप आ सकता है। यदि ग्लोबल हेडक्वार्टर और लोकल टीम के बीच सही तालमेल नहीं बना, तो यह सेंटर की प्रोडक्टिविटी को प्रभावित कर सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.