Indian-Founded Unicorns: विदेश में रचे गए स्टार्टअप्स की वैल्यू पहुंची **$560 अरब**, घरेलू कंपनियों से आगे

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Indian-Founded Unicorns: विदेश में रचे गए स्टार्टअप्स की वैल्यू पहुंची **$560 अरब**, घरेलू कंपनियों से आगे

भारतीय मूल के उद्यमियों ने भारत के बाहर **$560 अरब** के स्टार्टअप्स खड़े किए हैं, जो घरेलू यूनिकॉर्न की **$349 अरब** की वैल्यू को पीछे छोड़ चुके हैं। इनमें से **91%** स्टार्टअप अमेरिका से संचालित हो रहे हैं, जो भारतीय टैलेंट के वैश्विक माइग्रेशन को दर्शाता है।

वैश्विक बाजार में भारतीय दम

Prosus और Dealroom की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में पले-बढ़े लोगों द्वारा स्थापित 205 यूनिकॉर्न अब दुनिया भर में काम कर रहे हैं। इन कंपनियों की कुल वैल्यू $560 अरब है। तुलनात्मक रूप से, भारत के अंदर मौजूद 102 यूनिकॉर्न की सामूहिक वैल्यू $349 अरब है। यह डेटा साफ दिखाता है कि बड़ी फंडिंग और बेहतर इकोसिस्टम के लिए भारतीय उद्यमी विदेशों का रुख कर रहे हैं।

अमेरिका क्यों है पसंद?

आंकड़े चौंकाने वाले हैं—विदेशों में मौजूद यूनिकॉर्न का 91% हिस्सा सीधे अमेरिका में स्थित है। विश्लेषण की गई 323 कंपनियों में से 200 या तो अमेरिका में ही लॉन्च हुईं या शुरू होते ही अपना बेस वहां शिफ्ट कर लिया। निवेशकों के लिए यह एक संकेत है कि भारत टैलेंट तो पैदा कर रहा है, लेकिन बड़े स्केल और ग्लोबल कैपिटल के लिए यूएसए (USA) का इकोसिस्टम आज भी पहली पसंद बना हुआ है।

निवेश के लिहाज से क्या बदला है?

विदेश में बसे इन यूनिकॉर्न में Zscaler, Rubrik, Nutanix, Palo Alto Networks और Perplexity जैसे बड़े नाम शामिल हैं। जब ये कंपनियां अमेरिका में लिस्ट होती हैं, तो भारतीय निवेशकों को इनके ग्रोथ का फायदा सीधे नहीं मिल पाता। हालांकि, भारत में Flipkart, Zomato और Groww जैसी कंपनियों की सक्सेस और लिस्टिंग यह साबित कर रही है कि अब भारतीय मार्केट भी बड़े स्तर की कंपनियों को संभालने के लिए तैयार हो रहा है। आने वाले समय में सरकारी नीतियों और घरेलू फंडिंग का रुख ही यह तय करेगा कि क्या भारत अपनी प्रतिभा को अपने ही घर में रोक पाएगा या नहीं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.