Indian Equity Fundraising Surges 163% to ₹1.1 Lakh Crore in July

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AuthorAditya Rao|Published at:
Indian Equity Fundraising Surges 163% to ₹1.1 Lakh Crore in July

भारतीय कंपनियों ने जुलाई 2026 में इक्विटी के ज़रिये ₹1.1 लाख करोड़ जुटाए, जो जून की तुलना में 163% अधिक है। IPOs में उछाल और प्रेफरेंशियल शेयर जारी करने में बढ़ोतरी से यह तेज़ी आई, जो कि कर्ज़ आधारित फंड जुटाने में नरमी के बावजूद कॉर्पोरेट के विश्वास को दर्शाती है।

इक्विटी मार्केट में फंडरेज़िंग का शानदार प्रदर्शन

जुलाई 2026 में भारतीय इक्विटी मार्केट में फंडरेज़िंग (Fundraising) की गतिविधि में ज़बरदस्त तेज़ी देखी गई। इस महीने कंपनियों ने कुल ₹1.1 लाख करोड़ का फंड जुटाया, जो पिछले महीने की तुलना में 163% की भारी बढ़ोतरी है। यह वृद्धि मुख्य रूप से इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग्स (IPOs) में फिर से आई दिलचस्पी और प्रेफरेंशियल शेयर जारी करने (Preferential Share Issuances) में हुई बढ़ोतरी के कारण संभव हुई है।

IPOs का दमदार वापसी

इस दौरान इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) सेगमेंट ने फंडरेज़िंग में बड़ा योगदान दिया। जुलाई में 19 कंपनियों ने अपने IPO लॉन्च किए, जिनसे कुल लगभग ₹18,600 करोड़ जुटाए गए। लिस्टिंग के पहले दिन ज़्यादातर नए IPOs अपने इश्यू प्राइस पर या उससे ऊपर ट्रेड करते दिखे, जो निवेशकों के बढ़ते विश्वास का संकेत है।

प्रेफरेंशियल इश्यूज का बढ़ता चलन

IPO के अलावा, लिस्टेड कंपनियों ने अपने बैलेंस शीट को मजबूत करने के लिए प्रेफरेंशियल इश्यूज का भी खूब इस्तेमाल किया। जुलाई में कुल फंडरेज़िंग का 68% हिस्सा प्रेफरेंशियल इश्यूज से आया, जबकि क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट्स (QIPs) का योगदान 32% रहा। आगे जारी करने के ज़रिये फंडरेज़िंग में 209% का मासिक उछाल देखा गया, जो ₹93,400 करोड़ तक पहुँच गया। यह दर्शाता है कि कॉर्पोरेट अपनी पूंजी की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए सीधे प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट को तरजीह दे रहे हैं।

डेट मार्केट में नरमी

वहीं दूसरी ओर, इक्विटी फंडरेज़िंग में ज़बरदस्त तेज़ी के बावजूद, डेट इंस्ट्रूमेंट्स (Debt Instruments) सहित कुल फंड जुटाने के माहौल में थोड़ी नरमी दिखी। इक्विटी, डेट और बिजनेस ट्रस्ट्स में कुल फंड कलेक्शन जुलाई में 24% घटकर ₹2.3 लाख करोड़ रह गया। इसका मुख्य कारण डेट इश्यूज़ में 54% की गिरावट है, जो ₹1.2 लाख करोड़ तक गिर गए। डेट सेगमेंट में, कमर्शियल पेपर इश्यूज़ 63% और नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर्स 30% गिरे।

निवेशक की चुनिंदा सोच और जोखिम

इक्विटी फंडरेज़िंग में उछाल के बावजूद, मार्केट में निवेशक अब ज़्यादा चुनिंदा हो गए हैं। वे स्पष्ट बिज़नेस फंडामेंटल्स और बेहतर वैल्यूएशन वाली कंपनियों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। हालांकि इक्विटी कैपिटल बढ़ने से कंपनियों को विस्तार या कर्ज घटाने में मदद मिल सकती है, लेकिन निवेशक अक्सर बड़े पैमाने पर प्रेफरेंशियल इश्यूज से होने वाले शेयर डाइल्यूशन (Share Dilution) के दीर्घकालिक प्रभाव को बारीकी से देखते हैं। भविष्य में, कंपनियों की ग्रोथ प्लान को लागू करने और कैपिटल एलोकेशन को कुशलता से प्रबंधित करने की क्षमता शेयरधारकों के लिए मुख्य फोकस बनी रहेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.