भारतीय शेयर बाज़ार में जुलाई में व्यापक तेजी, स्मॉल-कैप और मिड-कैप ने मारी बाज़ी!

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AuthorAditya Rao|Published at:
भारतीय शेयर बाज़ार में जुलाई में व्यापक तेजी, स्मॉल-कैप और मिड-कैप ने मारी बाज़ी!

भारतीय शेयर बाज़ार ने जुलाई में अपनी रफ्तार बनाए रखी, जहां लगातार दूसरे महीने बढ़त वाले शेयरों की संख्या गिरावट वालों से ज़्यादा रही। तिमाही नतीजों, विदेशी निवेशकों की वापसी और मिड-कैप व स्मॉल-कैप शेयरों में बढ़ती दिलचस्पी ने इस व्यापक रैली को सहारा दिया।

जुलाई में शेयर बाज़ार का शानदार प्रदर्शन

भारतीय शेयर बाज़ारों ने जुलाई के महीने में लगातार मजबूती दिखाई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) के आंकड़े बताते हैं कि एडवांस-डिक्लाइन रेशियो, जो कि बाज़ार की चौड़ाई का एक अहम पैमाना है, 1.03 के स्तर से ऊपर रहा। इस दौरान, 2,482 शेयरों में बढ़त देखी गई, जबकि 2,416 शेयरों में गिरावट आई, जो बाज़ार में व्यापक सकारात्मकता का संकेत है।

बाज़ार के अलग-अलग हिस्सों का प्रदर्शन

यह तेज़ी सिर्फ बड़ी कंपनियों (ब्लू-चिप स्टॉक्स) तक ही सीमित नहीं रही। जहां Nifty 50 इंडेक्स ने जुलाई में 2.2% की बढ़त दर्ज की, वहीं मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट में और भी ज़्यादा गतिविधि देखने को मिली। Nifty Midcap 100 इंडेक्स 1.8% चढ़ा, जबकि Nifty Smallcap 100 इंडेक्स 2.5% की बढ़त के साथ ब्रॉडर मार्केट में सबसे आगे रहा। यह निवेशकों की बदलती रुचि को दर्शाता है, क्योंकि वे बड़े और स्थिर इंडेक्स की तुलना में बेहतर रिटर्न की तलाश में छोटी कंपनियों की ओर बढ़ रहे हैं।

जुलाई की रैली के पीछे के कारण

इस तेज़ी के पीछे कई अहम कारण रहे। सबसे बड़ा सहारा जून तिमाही के फाइनेंशियल नतीजों (financial results) से मिला, जिसने कंपनियों की लाभप्रदता (profitability) को लेकर निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। घरेलू नतीजों के अलावा, बाज़ार को विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) की ओर से मिले नए निवेश से भी फायदा हुआ। बाज़ार की रिपोर्टों के अनुसार, अंतर्राष्ट्रीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) स्टॉक्स से पूंजी का एक हिस्सा उभरते बाज़ारों (emerging markets) की ओर घूमा, जिससे महीने के उत्तरार्ध में भारतीय एक्सचेंजों में लिक्विडिटी (liquidity) बढ़ी।

आने वाले महीनों के लिए निवेशक किन बातों पर रखें नज़र?

हालांकि बाज़ार का मौजूदा सेंटीमेंट (sentiment) सकारात्मक बना हुआ है, लेकिन इस रैली की स्थिरता कई बाहरी और आंतरिक कारकों पर निर्भर करेगी। निवेशकों को विदेशी पोर्टफोलियो इनफ्लो (inflows) की निरंतरता पर नज़र रखनी चाहिए, क्योंकि ये कीमतों को स्थिर रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा, भारतीय रुपये का डॉलर के मुकाबले स्थिर रहना और घरेलू खुदरा भागीदारी (retail participation) का स्तर इस गति को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण होगा। भले ही ब्रॉडर मार्केट ने लचीलापन दिखाया है, लेकिन बाज़ार के प्रतिभागी वैश्विक मैक्रोइकॉनोमिक (macroeconomic) स्थितियों और ब्याज दरों में किसी भी बदलाव के आधार पर अस्थिरता (volatility) के प्रति सचेत हैं। अगले क्वार्टर में आने वाले कॉर्पोरेट अपडेट्स और व्यापक आर्थिक संकेतकों से बाज़ार की मौजूदा चाल का परीक्षण होने की संभावना है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.