वित्तीय वर्ष **2027** की पहली छमाही में भारतीय कंपनियों का क्रेडिट रेश्यो **2.18x** के मजबूत स्तर पर पहुंच गया है। CRISIL की रिपोर्ट के अनुसार, इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च और कम कर्ज के कारण कंपनियां ग्लोबल चुनौतियों का डटकर मुकाबला कर रही हैं।
CRISIL Ratings के ताजा आंकड़े भारतीय कॉर्पोरेट जगत के लिए एक मजबूत तस्वीर पेश कर रहे हैं। फाइनेंशियल ईयर 2027 की पहली छमाही में क्रेडिट रेश्यो 2.18 गुना दर्ज किया गया है, जो पिछली छमाही के 1.50 गुना से कहीं बेहतर है। इसका सीधा मतलब है कि डाउनग्रेड के मुकाबले अपग्रेड होने वाली कंपनियों की संख्या काफी ज्यादा है, जो एक स्टेबल बिजनेस एनवायरनमेंट की ओर इशारा करता है।
इस तेजी की असली वजह क्या है?
इस सकारात्मक ट्रेंड का सबसे बड़ा इंजन 'इंफ्रास्ट्रक्चर स्पेंडिंग' रहा है। अपग्रेड होने वाली करीब 40% कंपनियां रोड कंस्ट्रक्शन, रिन्यूएबल एनर्जी और कैपिटल गुड्स जैसे सेक्टर से जुड़ी हैं। सरकार का बड़े प्रोजेक्ट्स पर लगातार फोकस इस सेक्टर के लिए डिमांड का एक मजबूत आधार (Demand Floor) बना हुआ है, जो ग्लोबल इकोनॉमी की अनिश्चितताओं के बीच भी कंपनियों को सुरक्षित रखे हुए है।
बेहतर बैलेंस शीट का दम
कॉर्पोरेट की स्थिरता की एक बड़ी वजह 'प्रूडेंट कैपिटल मैनेजमेंट' है। कंपनियों का मीडियन डेट-टू-इक्विटी रेश्यो 0.5 गुना के आसपास है। यानी कंपनियां अपने ऑपरेशंस के लिए कर्ज पर बहुत ज्यादा निर्भर नहीं हैं। यह कम कर्ज उन्हें महंगाई और फ्यूल की बढ़ती कीमतों के झटकों को आसानी से झेलने की क्षमता देता है।
सेक्टर स्पेसिफिक रिस्क और बैंकिंग सेक्टर
हालांकि, टेक्सटाइल और डायमंड सेक्टर अभी भी मुश्किलों में हैं। सस्ते इंपोर्ट और सप्लाई चेन की बाधाओं के कारण इन सेक्टर्स में मार्जिन पर दबाव है। दूसरी ओर, बैंकिंग सेक्टर स्थिर है। CRISIL का अनुमान है कि पूरे साल क्रेडिट ग्रोथ 14.5% से 15.5% के बीच रह सकती है और बैड लोन (Gross NPA) 2% के नीचे रहने की उम्मीद है।
निवेशकों को अब ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों (Brent Crude) पर नजर रखनी चाहिए, जिसके $88 से $93 प्रति बैरल रहने का अनुमान है।
