ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और अमेरिका में बढ़ती ब्याज दरों के कारण भारतीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड **7%** के स्तर को छूने की ओर बढ़ रही है।
बॉन्ड मार्केट में क्यों है पैनिक?
मार्केट में बॉन्ड यील्ड का बढ़ना इस बात का संकेत है कि निवेशक अब मौजूदा बॉन्ड से ज्यादा रिटर्न की मांग कर रहे हैं। जब यील्ड बढ़ती है, तो पुराने बॉन्ड्स की कीमतें नीचे गिरती हैं। मौजूदा समय में Brent Crude का भाव $96 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है, जो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए चिंता का विषय है। महंगा तेल मतलब ज्यादा इम्पोर्ट बिल, जिससे देश में महंगाई (Inflation) बढ़ने का खतरा है। महंगाई बढ़ते ही बॉन्ड की असली वैल्यू कम होने लगती है, जिसके चलते निवेशक बॉन्ड बेचकर बाहर निकल रहे हैं।
ग्लोबल मार्केट का असर
केवल तेल ही नहीं, अमेरिका के बॉन्ड मार्केट का भी भारतीय बाजार पर गहरा असर पड़ रहा है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 3 साल के उच्चतम स्तर पर हैं, जिससे ग्लोबल निवेशक इमर्जिंग मार्केट्स के बजाय अमेरिकी डेट मार्केट को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। इसके अलावा, मार्केट में इस बात की चर्चा तेज है कि US Federal Reserve ब्याज दरों में 25 बेसिस पॉइंट्स की और बढ़ोतरी कर सकता है, जिसकी संभावना फिलहाल 68% आंकी जा रही है।
अब आगे क्या?
निवेशकों की नजरें अब Reserve Bank of India (RBI) की अगली पॉलिसी और महंगाई के आंकड़ों पर टिकी हैं। केंद्रीय बैंक किस तरह से लिक्विडिटी को मैनेज करता है और महंगाई को कंट्रोल करने के लिए क्या रुख अपनाता है, यही तय करेगा कि भारतीय बॉन्ड मार्केट में गिरावट कब थमेगी। फिलहाल मार्केट में काफी उतार-चढ़ाव (Volatility) देखने को मिल सकता है, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है।
