RBI पॉलिसी से पहले भारतीय बॉन्ड में स्थिरता, ₹23,500 करोड़ की नीलामी पर नजर

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
RBI पॉलिसी से पहले भारतीय बॉन्ड में स्थिरता, ₹23,500 करोड़ की नीलामी पर नजर

मंगलवार को भारतीय सरकारी बॉन्ड यील्ड (Bond Yield) में स्थिरता देखी गई, क्योंकि निवेशक रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के नीतिगत फैसले का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में, बाजार लगभग **₹23,500 करोड़** की राज्य ऋण नीलामी के लिए भी तैयार है, जो निवेशकों की मांग का परीक्षण करेगा।

RBI के फैसले पर टिकी निगाहें

मंगलवार को शुरुआती कारोबार में भारतीय सरकारी बॉन्ड में खास हलचल नहीं दिखी। बेंचमार्क 6.94% 2036 बॉन्ड यील्ड 6.8346% पर स्थिर रहा। निवेशक सतर्क रुख अपनाए हुए हैं और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की आगामी मॉनेटरी पॉलिसी (Monetary Policy) घोषणा का इंतजार कर रहे हैं। अनुमान है कि RBI रेपो रेट (Repo Rate) को अपरिवर्तित रखेगा, क्योंकि घरेलू महंगाई (Inflation) और ग्रोथ (Growth) के आंकड़े स्थिर दिख रहे हैं।

₹23,500 करोड़ की राज्य ऋण नीलामी

RBI की पॉलिसी के अलावा, बॉन्ड मार्केट आज एक बड़ी सप्लाई टेस्ट का सामना कर रहा है। भारतीय राज्यों द्वारा कुल ₹23,500 करोड़ के बॉन्ड की नीलामी होनी है। बाजार सहभागियों की इन नीलामी पर पैनी नजर है ताकि राज्य-स्तरीय ऋण (State-level Debt) के प्रति मौजूदा मांग का पता लगाया जा सके। यह मांग इस हफ्ते के बाकी दिनों में बॉन्ड यील्ड और बाजार लिक्विडिटी (Market Liquidity) को प्रभावित कर सकती है। बड़ी सप्लाई अक्सर यील्ड पर दबाव डालती है, खासकर अगर मांग वॉल्यूम के हिसाब से कम हो।

आर्थिक और वैश्विक दबाव

घरेलू स्तर पर स्थिति स्थिर होने के बावजूद, बाहरी जोखिम बाजार की धारणा को प्रभावित कर रहे हैं। कच्चे तेल की कीमतें, जो भारत की महंगाई और आयात लागत को प्रभावित करती हैं, अस्थिर बनी हुई हैं। पिछली बार 7% की गिरावट के बाद, तेल की कीमतें $84.8 प्रति बैरल के करीब थोड़ा सुधर कर कारोबार कर रही हैं। पश्चिम एशिया की स्थिति और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।

निवेश के रुझान और विदेशी फ्लो

हाल के हफ्तों में भारतीय ऋण में विदेशी निवेश (Foreign Investment) में बदलाव आया है। पिछले दो महीनों की लगातार खरीदारी के बाद, जुलाई के अंत में विदेशी निवेशकों ने ₹3,400 करोड़ से अधिक की बिकवाली की। इस उलटफेर का एक कारण अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड (US Treasury Yields) में बढ़ोतरी और भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) जैसे वैश्विक कारक रहे हैं। इसके अलावा, ब्लूमबर्ग बॉन्ड इंडेक्स (Bloomberg Bond Index) में भारत के शामिल होने में देरी से पैसिव विदेशी इनफ्लो (Passive Foreign Inflows) की उम्मीदें कम हुई हैं। इन आउटफ्लो (Outflows) के बावजूद, एनआरआई (NRI) के लिए RBI की फॉरेन-करेंसी डिपॉजिट स्कीम में $36.7 बिलियन के महत्वपूर्ण इनफ्लो (Inflows) ने रुपये और बाजार की स्थिरता को सहारा दिया है।

इंटरेस्ट रेट स्वैप्स (Interest Rate Swaps)

ओवरनाइट इंडेक्स स्वैप (OIS) दरों में हलचल बाजार की वर्तमान सावधानी को दर्शाती है। एक साल की स्वैप दर 5.89% पर 1.25 बेसिस पॉइंट बढ़ी, जबकि पांच साल की स्वैप दर 6.38% पर 1.5 बेसिस पॉइंट बढ़ी। ये समायोजन बताते हैं कि ट्रेडर्स लगातार तेल की कीमतों में अस्थिरता और वैश्विक आर्थिक बदलावों से जुड़े संभावित जोखिमों को ध्यान में रख रहे हैं। निवेशक अब भविष्य की लिक्विडिटी मैनेजमेंट (Liquidity Management) और चालू फाइनेंशियल ईयर (Financial Year) के बाकी हिस्सों के लिए महंगाई के अनुमान पर मार्गदर्शन के लिए आधिकारिक RBI स्टेटमेंट पर नजर रखेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.