Indian Bonds Rally: RBI मीटिंग से पहले तेल की कीमतों में गिरावट, यील्ड्स पहुंचे 6.77% पर

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Indian Bonds Rally: RBI मीटिंग से पहले तेल की कीमतों में गिरावट, यील्ड्स पहुंचे 6.77% पर

भारतीय सरकारी बॉन्ड यील्ड्स (Bond Yields) 5 अगस्त को गिरकर **6.77%** पर आ गए। ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतों में नरमी से महंगाई की चिंता कम हुई है। अब निवेशकों की नजर RBI की पॉलिसी रिव्यू पर है, जहां रेपो रेट (Repo Rate) के **5.25%** पर स्थिर रहने की उम्मीद है।

बॉन्ड मार्केट में आई रौनक

5 अगस्त को भारतीय सरकारी बॉन्ड में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। बेंचमार्क 10-साल के बॉन्ड पर यील्ड (Yield) घटकर 6.77% पर पहुंच गया। बॉन्ड मार्केट में जब यील्ड्स गिरते हैं, तो इसका मतलब है कि बॉन्ड की कीमतें बढ़ी हैं, जो निवेशकों के बढ़ते भरोसे का संकेत देता है।

तेल की कीमतों ने दी राहत

इस उछाल की मुख्य वजह ग्लोबल ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में आई गिरावट रही। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, इसलिए ऊर्जा की कम लागत से इंपोर्टेड महंगाई (Imported Inflation) का खतरा कम हो जाता है। इसने अर्थव्यवस्था पर दबाव कम किया और बॉन्ड निवेशकों को थोड़ी राहत दी है।

RBI की पॉलिसी और महंगाई पर नजर

ज्यादातर एक्सपर्ट्स का मानना है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) मौजूदा रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखेगी। RBI फिलहाल न्यूट्रल (Neutral) स्टैंड पर है, यानी वह न तो तेजी से ब्याज दरें बढ़ा रहा है और न ही घटा रहा है।

हालांकि, RBI का फैसला अहम होगा क्योंकि जून में रिटेल महंगाई (Retail Inflation) बढ़कर 4.38% हो गई थी, जो मई में 3.93% थी। तेल की कीमतों में गिरावट का सपोर्ट तो है, लेकिन RBI यह देखना चाहेगा कि महंगाई में यह बढ़ोतरी अस्थायी है या यह एक लगातार बनी रहने वाली समस्या बन सकती है। RBI को ग्रोथ और कीमतों को स्थिर रखने के बीच संतुलन बनाना होगा।

आगे क्या हो सकता है?

फिलहाल सेंटीमेंट पॉजिटिव है, लेकिन कई चीजें बॉन्ड मार्केट के रुख को बदल सकती हैं। तेल उत्पादक क्षेत्रों में भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) कीमतों में अचानक उछाल ला सकता है। इसके अलावा, निवेशक मानसून के प्रदर्शन पर भी कड़ी नजर रख रहे हैं, क्योंकि यह खाने-पीने की चीजों की कीमतों और महंगाई को प्रभावित करता है।

अमेरिका की ब्याज दरों और करेंसी में उतार-चढ़ाव भी भारत के डेट मार्केट (Debt Market) में विदेशी निवेश को प्रभावित करते हैं। अगर ग्लोबल रेट्स ऊंचे बने रहते हैं, तो यह भारतीय बॉन्ड की मांग पर असर डाल सकता है।

निवेशकों के लिए सबसे अहम RBI की तरफ से आने वाली पॉलिसी का ऐलान और गवर्नर का बयान होगा। खास तौर पर, बाजार यह जानने की कोशिश करेगा कि RBI महंगाई के जोखिमों को कैसे मैनेज करने की योजना बना रहा है और भविष्य में ब्याज दरों का रुख क्या हो सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.