ग्लोबल मार्केट से मिले राहत भरे संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बीच आज भारतीय सरकारी बॉन्ड में मजबूती देखी जा रही है। निवेशकों की नजर अब सरकारी कर्ज के **₹36,000 करोड़** के बड़े ऑक्शन पर है, जिससे बाजार की दिशा तय होगी।
शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2026 को भारतीय सरकारी बॉन्ड के दाम में उछाल देखा गया और यील्ड (yield) में गिरावट दर्ज हुई। बेंचमार्क 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड पिछले सत्र के 7.28% से सुधरकर 7.26% के पास ट्रेड करती दिखी। इस रिकवरी के पीछे मुख्य वजह इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों का ठंडा पड़ना और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में स्थिरता है।
सरकारी ऑक्शन पर टिकी निगाहें
आज का सबसे अहम इवेंट सरकार द्वारा आयोजित होने वाला डेट ऑक्शन है। सरकार 7.06% GS 2041 और 7.43% GS 2076 जैसी सिक्योरिटीज के जरिए बाजार से ₹36,000 करोड़ जुटाने की तैयारी में है। मार्केट पार्टिसिपेंट्स इस नीलामी के कट-ऑफ यील्ड पर नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि यह सरकारी पेपर के प्रति निवेशकों की मांग का असली टेस्ट होगा। लिक्विडिटी की तंगी को देखते हुए, अगर संस्थागत निवेशकों की भागीदारी कमजोर रहती है, तो मौजूदा सकारात्मक सेंटीमेंट पर असर पड़ सकता है।
RBI की पॉलिसी और महंगाई का दबाव
बाजार की चाल पूरी तरह से Reserve Bank of India (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी पर निर्भर है। हाल ही में MPC बैठक में रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट्स बढ़ाकर 5.50% कर दिया गया है। आरबीआई ने महंगाई को काबू में करने के लिए 'कैलिब्रेटेड टाइटनिंग' का रुख अपनाया है।
हालांकि क्रूड ऑयल की कीमतों में गिरावट से राहत जरूर मिली है, लेकिन ऊर्जा की लागत अभी भी महंगाई के मोर्चे पर बड़ा रिस्क है। आरबीआई का हर फैसला डेटा-आधारित है, इसलिए ऊर्जा कीमतों में कोई भी नया उछाल और आक्रामक मौद्रिक कदम उठाने पर मजबूर कर सकता है।
आगे की चुनौतियां और आउटलुक
बाजार अब भविष्य में ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की संभावनाओं को डिस्काउंट कर रहा है। एनालिस्ट्स का मानना है कि टर्मिनल रेपो रेट 6.00% से 6.25% के बीच स्थिर हो सकता है। यदि महंगाई ऊंची बनी रहती है, तो रेट हाइक की उम्मीदें लॉन्ग-टर्म गवर्नमेंट सिक्योरिटीज को निवेशकों के लिए कम आकर्षक बना सकती हैं।
