ग्लोबल स्तर पर कम होती वोलेटिलिटी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के चलते भारतीय सरकारी बॉन्ड में तेजी देखने को मिल सकती है। निवेशक अब Reserve Bank of India के अगले पॉलिसी रुख पर नजर गड़ाए हुए हैं। बेंचमार्क **6.94% 2036** बॉन्ड यील्ड के **7.14%** से **7.18%** के दायरे में ट्रेड करने का अनुमान है।
भारतीय सॉवरेन बॉन्ड के लिए आज का दिन काफी सकारात्मक रहने की उम्मीद है। ग्लोबल इकोनॉमिक प्रेशर में कमी आने से बॉन्ड यील्ड नीचे आ रही हैं, जिसका सीधा मतलब है कि बॉन्ड की कीमतें बढ़ेंगी। यह मौजूदा बॉन्ड होल्डर्स के लिए एक राहत भरी खबर है। इस बदलाव के पीछे मुख्य वजह अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में स्थिरता और कच्चे तेल की कीमतों में आई नरमी है, जो सीधे तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था और महंगाई को प्रभावित करते हैं।
तेल और बॉन्ड का सीधा कनेक्शन
भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के रूप में आयात करता है। जब तेल के दाम बढ़ते हैं, तो आयात बिल बढ़ जाता है, जिससे देश में महंगाई का दबाव बढ़ता है और सरकारी फिस्कल डेफिसिट पर असर पड़ता है। फिलहाल, Brent crude फ्यूचर्स गिरकर $103 प्रति बैरल के आसपास आ गए हैं, जिससे बॉन्ड बाजार को थोड़ी राहत मिली है।
RBI और स्वैप मार्केट का मूड
निवेशकों की नजरें अब RBI की अगली पॉलिसी रिव्यू पर टिकी हैं। ग्लोबल स्तर पर, खासकर US Federal Reserve के रुख से बाजार की चाल तय हो रही है। इस बात की संभावना बढ़ गई है कि फेड अब आक्रामक ब्याज दरों की बढ़ोतरी को थोड़ा विराम दे सकता है। इसका असर स्वैप मार्केट में भी दिखा है, जहां एक साल की ओवरनाइट इंडेक्स स्वैप रेट 5.25 बेसिस पॉइंट्स गिरकर 6.19% पर आ गई है।
आगे की राह
हालांकि बाजार फिलहाल बॉन्ड्स के लिए सपोर्टिव दिख रहा है, लेकिन सब कुछ महंगाई के आंकड़ों पर निर्भर करेगा। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर ग्लोबल एनर्जी कीमतें ज्यादा बनी रहीं, तो केंद्रीय बैंक को आने वाले साल में 100 बेसिस पॉइंट्स तक की और मॉनेटरी टाइटनिंग करनी पड़ सकती है। निवेशकों को 6.94% 2036 बॉन्ड के 7.15% सपोर्ट लेवल पर नजर रखनी चाहिए। अगर यह इसके नीचे टिकता है, तो घरेलू इंस्टीट्यूशनल प्लेयर्स की खरीदारी बढ़ सकती है।
