Indian Bond Yields: ब्लोमबर्ग ने इंडेक्स में शामिल करने में की देरी, 10-साल की यील्ड पहुंची 6.86%

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AuthorKaran Malhotra|Published at:
Indian Bond Yields: ब्लोमबर्ग ने इंडेक्स में शामिल करने में की देरी, 10-साल की यील्ड पहुंची 6.86%

भारतीय सरकारी बॉन्ड की कीमतों में गिरावट आई है, जिससे 10-साल की यील्ड बढ़कर **6.858%** हो गई है। यह सब तब हुआ जब ब्लूमबर्ग ने भारतीय डेट को अपने प्रमुख इंडेक्स में शामिल करने में देरी कर दी। इस फैसले से उम्मीद के मुताबिक विदेशी निवेश आने में रुकावट आई है, जो रुपये को सहारा दे सकते थे। अब निवेशक आगे की दिशा के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की आने वाली पॉलिसी मीटिंग पर नजरें टिकाए हुए हैं।

बॉन्ड यील्ड में क्यों आई तेजी?

3 अगस्त को भारतीय सरकारी बॉन्ड की कीमतों में गिरावट देखी गई, जिसके कारण उधार लेने की लागत बढ़ गई। बेंचमार्क 10-साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड पिछले सत्र के 6.834% के क्लोज से बढ़कर 6.858% हो गई। आसान भाषा में समझें तो जब बॉन्ड यील्ड बढ़ती है, तो उन बॉन्ड की कीमतें गिर जाती हैं, जो निवेशकों की मांग में नरमी का संकेत देता है।

ब्लूमबर्ग इंडेक्स में देरी का असर

बाजार की यह प्रतिक्रिया इंडेक्स प्रोवाइडर ब्लूमबर्ग की घोषणा के बाद आई है, जिसने भारतीय सरकारी सिक्योरिटीज को अपने ग्लोबल बॉन्ड इंडेक्स में शामिल करने में देरी करने का फैसला किया है। यह कदम कई निवेशकों के लिए अप्रत्याशित था, जो बड़ी मात्रा में विदेशी पूंजी आने की उम्मीद लगा रहे थे। ब्लूमबर्ग ने कहा कि वे चाहते हैं कि भारतीय बॉन्ड बाजार में हाल के संरचनात्मक बदलाव पूरी तरह से स्थिर हो जाएं और अपनी मजबूती दिखाएं, उसके बाद ही वे आगे बढ़ेंगे।

इस साल की शुरुआत में, नीतिगत बदलावों के कारण उम्मीदें काफी बढ़ गई थीं, जिसमें कुछ सरकारी सिक्योरिटीज पर कैपिटल गेन टैक्स का हटना और फुली एक्सेसिबल रूट (Fully Accessible Route) के तहत विशेष अल्ट्रा-लॉन्ग ड्यूरेशन बॉन्ड का शामिल होना शामिल था। इन बदलावों का उद्देश्य भारतीय डेट को वैश्विक निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बनाना था और विदेशी संस्थागत निवेश में अरबों डॉलर लाकर भारतीय रुपये को संरचनात्मक सहारा प्रदान करना था।

RBI पॉलिसी और बाजार का रुख

इंडेक्स में शामिल होने की खबर अब पीछे छूट गई है, इसलिए बॉन्ड बाजार का ध्यान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर चला गया है। केंद्रीय बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (Monetary Policy Committee) इस सप्ताह बाद में बैठक करने वाली है। अधिकांश बाजार विश्लेषक और अर्थशास्त्री उम्मीद करते हैं कि RBI ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखेगा, ताकि महंगाई के रुझानों और व्यापक आर्थिक स्थिरता की निगरानी की जा सके।

तत्काल विदेशी इंडेक्स इनफ्लो की कमी का मतलब है कि बाजार अब घरेलू लिक्विडिटी की स्थिति और मुद्रास्फीति व ग्रोथ पर RBI की टिप्पणियों पर अधिक सीधे प्रतिक्रिया दे सकता है। निवेशक केंद्रीय बैंक के ब्याज दरों के प्रति भविष्य के दृष्टिकोण के संकेतों की तलाश करेंगे, क्योंकि यही निकट अवधि में बॉन्ड यील्ड का मुख्य चालक होगा। इस देरी के बाद बॉन्ड बाजार की स्थिरता इस बात पर निर्भर करेगी कि केंद्रीय बैंक लिक्विडिटी का प्रबंधन कैसे करता है और क्या बाजार पहुंच सुधारों पर कोई और अपडेट आता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.