ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने से भारतीय सरकारी बॉन्ड्स दबाव में हैं। सितंबर में महंगाई दर **5.54%** रहने के बाद RBI के रुख को लेकर बाजार सतर्क है, जिससे बॉन्ड यील्ड ऊपर जा रही है और निवेशकों को नुकसान हो रहा है।
भारतीय सरकारी बॉन्ड्स इस सप्ताह भारी दबाव में कारोबार कर रहे हैं। ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं, जिसका सीधा असर घरेलू महंगाई पर पड़ रहा है। बेंचमार्क 2036 बॉन्ड की यील्ड 7.42% के स्तर को छू सकती है, जो मौजूदा बॉन्ड होल्डर्स के लिए कीमतों में गिरावट का संकेत है।
क्यों चिंता का विषय है तेल की कीमतें?
भारत अपनी जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है। जब इंटरनेशनल मार्केट में तेल महंगा होता है, तो देश में फ्यूल और लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ जाती है, जिससे महंगाई को बढ़ावा मिलता है। महंगाई बढ़ने से बॉन्ड्स से मिलने वाला फिक्स्ड रिटर्न कम आकर्षक हो जाता है, जिसके कारण निवेशक नए बॉन्ड्स पर अधिक रिटर्न की मांग करते हैं। इस वजह से सेकेंडरी मार्केट में पुराने बॉन्ड्स की कीमतें नीचे गिर जाती हैं।
RBI और महंगाई का गणित
सितंबर की महंगाई दर 5.54% रही है, जो रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के 6% के ऊपरी सहिष्णुता स्तर के बहुत करीब है। यदि महंगाई काबू में नहीं आती है, तो RBI ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रख सकता है। यह 'Higher for Longer' वाला माहौल बॉन्ड मार्केट के लिए निगेटिव है।
डेट मार्केट पर असर
ओवरनाइट इंडेक्स्ड स्वैप मार्केट में काफी वोलेटिलिटी दिख रही है, जो ट्रेडर्स के बीच ऊंची कैपिटल कॉस्ट की आशंका को दर्शाता है। अगर आप डेट म्यूचुअल फंड्स या बॉन्ड्स में निवेशित हैं, तो आपको कच्चे तेल की कीमतों पर कड़ी नजर रखनी होगी। बाजार में स्थिरता तभी लौटेगी जब एनर्जी की कीमतों में नरमी आएगी या अगले कुछ महीनों में महंगाई के आंकड़े कम होते दिखेंगे।
