Indian Bond Market: RBI की सख्ती से थमी बॉन्ड यील्ड की रफ्तार, निवेशकों में सतर्कता

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AuthorMehul Desai|Published at:
Indian Bond Market: RBI की सख्ती से थमी बॉन्ड यील्ड की रफ्तार, निवेशकों में सतर्कता

भारतीय सरकारी बॉन्ड्स की यील्ड एक सीमित दायरे में फंसी हुई है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) बैंकिंग सिस्टम से एक्स्ट्रा लिक्विडिटी निकालने में जुटा है, जबकि ग्लोबल लेवल पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का दबाव मार्केट पर बना हुआ है।

भारतीय सरकारी बॉन्ड्स की चाल फिलहाल एक दायरे में सिमट कर रह गई है, जिससे ट्रेडर्स 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में हैं। 8 सितंबर, 2026 को बेंचमार्क 6.94% 2036 बॉन्ड की यील्ड 6.96% के आसपास ट्रेड करती दिखी। मार्केट को फिलहाल कोई स्पष्ट दिशा नहीं मिल पा रही है क्योंकि यह एक तरफ RBI की सख्त लिक्विडिटी पॉलिसी तो दूसरी तरफ ग्लोबल एनर्जी और ब्याज दरों के दबाव के बीच फंसा है।

RBI का लिक्विडिटी मैनेजमेंट

बाजार में इस सुस्ती की सबसे बड़ी वजह RBI का बैंकिंग सिस्टम से सरप्लस कैश को तेजी से बाहर निकालना है। 6 सितंबर, 2026 तक बैंकिंग सिस्टम में ₹11.16 लाख करोड़ की भारी-भरकम लिक्विडिटी मौजूद थी। महंगाई को काबू में रखने के लिए RBI ने वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) ऑक्शन का सहारा लिया है, जिसके जरिए हालिया सेशंस में ₹8.5 लाख करोड़ से ज्यादा की राशि सिस्टम से खींची गई है। यह कदम भारी विदेशी फंड्स के इनफ्लो और FCNR(B) डिपॉजिट्स के प्रभाव को बेअसर करने के लिए जरूरी माना जा रहा है।

ग्लोबल दबाव का असर

घरेलू लिक्विडिटी के अलावा, विदेशी संकेत भी निवेशकों को डरा रहे हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल $97 प्रति बैरल के आसपास है, जो भारत जैसे बड़े ऑयल इंपोर्टर के लिए चिंता का विषय है। इससे महंगाई बढ़ने का डर बना हुआ है, जो RBI के लिए मोनेटरी पॉलिसी में नरमी लाना मुश्किल बनाता है।

साथ ही, अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड भी 4.78% पर बनी हुई है। जब अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो ग्लोबल इन्वेस्टर्स उभरते बाजारों के बजाय अमेरिकी बॉन्ड्स को तरजीह देते हैं। आगे चलकर यदि सिस्टम में लिक्विडिटी का दबाव और बढ़ा, तो RBI मार्केट स्टेबलाइजेशन बिल जैसे और कड़े कदम उठा सकता है, जिससे मार्केट में उतार-चढ़ाव बढ़ने की आशंका बनी रहेगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.