Indian Bond Yields: 2 महीने के हाई पर पहुंची यील्ड, RBI के सख्त संकेत और कच्चे तेल के दामों से मचा हड़कंप

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AuthorMehul Desai|Published at:
Indian Bond Yields: 2 महीने के हाई पर पहुंची यील्ड, RBI के सख्त संकेत और कच्चे तेल के दामों से मचा हड़कंप

21 अगस्त 2026 तक के इस फाइनेंशियल ईयर में इंडियन गवर्नमेंट बॉन्ड्स ने सबसे खराब साप्ताहिक प्रदर्शन दर्ज किया है। RBI की हॉकिश पॉलिसी मिनट्स और ग्लोबल क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल ने इस बिकवाली को हवा दी।

बॉन्ड मार्केट में क्यों आई गिरावट?

21 अगस्त 2026 तक के इस फाइनेंशियल ईयर में इंडियन गवर्नमेंट बॉन्ड्स ने निवेशकों को तगड़ा झटका दिया है। बॉन्ड की कीमतें गिरने के साथ ही यील्ड (Yield) - जो कीमतों के विपरीत दिशा में चलती है - 2 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। बेंचमार्क 6.94% 2036 बॉन्ड यील्ड लगभग 6.87% पर आ गई, जो डेट मार्केट (Debt Market) में सेंटीमेंट में बड़े बदलाव का संकेत है।

RBI की पॉलिसी मिनट्स का असर

बॉन्ड की कीमतों पर दबाव तब बढ़ा जब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की अगस्त पॉलिसी मीटिंग के मिनट्स जारी हुए। शुरुआती पॉलिसी स्टेटमेंट भले ही न्यूट्रल (Neutral) थी, लेकिन मिनट्स में कमेटी मेंबर्स के बीच अधिक हॉकिश (Hawkish) रुख सामने आया। इससे यह साफ होता है कि सेंट्रल बैंक लगातार बढ़ रही महंगाई (Inflation) को लेकर चिंतित है। नतीजा यह हुआ कि जो निवेशक पहले RBI से रेट कट (Rate Cut) की उम्मीद कर रहे थे, अब वे इस संभावना के लिए तैयार हो रहे हैं कि ब्याज दरें ऊंची बनी रह सकती हैं या बढ़ भी सकती हैं।

FCNR(B) डिपॉजिट हेजिंग फैसिलिटी का बंद होना

बाजार की चिंताएं यहीं नहीं रुकीं। FCNR(B) डिपॉजिट हेजिंग फैसिलिटी (Hedging Facility) का समय से पहले बंद होना भी एक बड़ा कारण बना। यह फैसिलिटी बैंकों को लिक्विडिटी (Liquidity) मैनेज करने में मदद करके बॉन्ड डिमांड को सपोर्ट करती थी। इसके हटने से बाजार में लिक्विडिटी कम हो गई, जिसका सीधा असर पांच साल के नोट पर पड़ा और हफ्ते भर में इसकी यील्ड में भारी उछाल देखा गया।

कच्चे तेल की कीमतों का बढ़ता बोझ

वैश्विक स्तर पर भी बॉन्ड मार्केट में बिकवाली के पीछे कई कारण रहे। ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) की कीमतें बढ़कर $93 से $94 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। चूँकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा तेल आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की ऊंची कीमतें घरेलू महंगाई को बढ़ाती हैं। जब महंगाई बढ़ती है, तो सेंट्रल बैंक को प्राइस कंट्रोल (Price Control) के लिए ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचा रखना पड़ता है, जो मौजूदा बॉन्ड होल्डर्स के लिए अच्छी खबर नहीं है।

आगे क्या?

फाइनेंशियल मार्केट्स (Financial Markets) अब भविष्य में रेट हाइक्स (Rate Hikes) की संभावना को भुना रहे हैं। यह इस साल की शुरुआत के विपरीत है, जब सभी की नजरें रेट कट पर टिकी थीं। ओवरनाइट इंडेक्स्ड स्वैप्स (Overnight Indexed Swaps) मार्केट का यह मूव इस बात की पुष्टि करता है कि बाजार अब ऊंची ब्याज दर वाले माहौल के लिए खुद को तैयार कर रहा है।

निवेशकों के लिए, RBI की आने वाली पॉलिसी रिव्यूज (Policy Reviews) पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा। भविष्य के फैसले महंगाई के रुख और ग्लोबल ऑयल की कीमतों पर निर्भर करेंगे। एनर्जी कॉस्ट (Energy Cost) में कोई भी और उछाल या सेंट्रल बैंक से भविष्य की रेट एक्शन (Rate Action) के बारे में कोई स्पष्ट संकेत बॉन्ड की कीमतों पर दबाव बनाए रख सकता है। निवेशक आने वाले महंगाई के आंकड़ों और सेंट्रल बैंक के बयानों पर नजर रख सकते हैं ताकि यह अंदाज़ा लगाया जा सके कि यह ब्याज दर का माहौल कब तक बना रह सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.