Indian Army ने अपनी सप्लाई चेन को मजबूत करने के लिए Food Corporation of India (FCI) के साथ **5 साल** का करार किया है। इस MoU के तहत सेना के डिपो पर अब 'Bharat Rice' की सीधी डिलीवरी होगी, जिससे लद्दाख और नॉर्थ-ईस्ट जैसे दुर्गम इलाकों में लॉजिस्टिक्स और अधिक कुशल बनेंगे।
सेना की सप्लाई चेन में बड़ा बदलाव
Indian Army ने राशन सप्लाई के पुराने सिस्टम को बदलते हुए अब सेंट्रलाइज्ड डिलीवरी मॉडल अपनाया है। इस 5 साल के समझौते का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अब स्थानीय यूनिट्स को FCI के केंद्रों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे, बल्कि अनाज सीधे सेना के डिपो पर पहुंचेगा।
चुनौतीपूर्ण इलाकों में मिलेगी राहत
यह कदम विशेष रूप से उन इलाकों के लिए गेम चेंजर साबित होगा जहां पहुंचना मुश्किल होता है, जैसे कि लद्दाख और नॉर्थ-ईस्ट। FCI के पास मौजूद आधुनिक साइलो (silos) और मजबूत बुनियादी ढांचे का इस्तेमाल करके सेना अपने जवानों तक राशन की जल्दी और सुरक्षित डिलीवरी सुनिश्चित कर पाएगी। यह सारा अनाज 2026-27 के फाइनेंशियल ईयर के लिए NAFED के जरिए सप्लाई किया जाएगा, जो खास डिफेंस स्टैंडर्ड्स के अनुसार तैयार होगा।
इंफ्रास्ट्रक्चर और लॉजिस्टिक्स पर फोकस
यह साझेदारी भारत के बदलते इंफ्रास्ट्रक्चर की एक झलक दिखाती है। सरकार जिस तरह से सरकारी एसेट्स को जोड़कर सप्लाई चेन को आधुनिक बना रही है, वह भविष्य में लॉजिस्टिक्स सेक्टर के लिए एक बड़ा केस स्टडी बन सकता है। हालांकि यह एक सरकारी प्रोग्राम है, लेकिन इन्वेस्टर जो लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग सेक्टर पर नजर रखते हैं, उनके लिए यह दिखाता है कि कैसे टेक्नोलॉजी और सरकारी तालमेल से सप्लाई की बाधाएं दूर की जा रही हैं।
आने वाली चुनौतियां
इस 5 साल के लंबे सफर में सबसे बड़ी परीक्षा होगी तालमेल बिठाने की। Indian Army, FCI, और NAFED को हर मौसम में बिना किसी रुकावट के राशन की डिलीवरी जारी रखनी होगी। अगर यह मॉडल सफल रहता है, तो भविष्य में अन्य जरूरी कमोडिटीज़ के लिए भी इसे अपनाया जा सकता है।
