भारतीय वायुसेना (IAF) ने अपने पहले बैच के **712** अग्निवीर वायु जवानों को नियमित कैडर में शामिल कर लिया है। यह संख्या कुल भर्ती के ठीक **25%** है। फिलहाल सरकार अग्निपथ योजना की समीक्षा कर रही है और भविष्य की रणनीतियों पर मंथन जारी है।
भारतीय वायुसेना ने अपने पहले अग्निपथ बैच के ट्रांजिशन की प्रक्रिया पूरी कर ली है। कुल 2,850 जवानों में से 712 जवानों को स्थायी कैडर में जगह मिली है, जो कि मौजूदा 25% रिटेंशन कैप के दायरे में है।
नीतिगत समीक्षा और ऑपरेशन्स
वर्ष 2022 में शुरू हुई अग्निपथ योजना की फिलहाल व्यापक समीक्षा चल रही है। वायुसेना, थल सेना और नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने 'डिपार्टमेंट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स' को अपना फीडबैक सौंपा है। मुख्य सवाल यह है कि क्या 25% की वर्तमान सीमा लंबी अवधि की युद्ध तत्परता के लिए पर्याप्त है? 12 अक्टूबर, 2026 तक, सरकार की तरफ से रिटेंशन कोटा में किसी बदलाव की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
रिटायर होने वाले अग्निवीरों के लिए करियर के अवसर
सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों के लिए सरकार ने विशेष व्यवस्था की है:
- गृह मंत्रालय: CAPF और असम राइफल्स में कॉन्स्टेबल और राइफलमैन के पदों पर 50% आरक्षण दिया गया है।
- रक्षा मंत्रालय: 16 डिफेंस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स (DPSUs) में पूर्व अग्निवीरों के लिए 10% कोटा फिक्स किया गया है।
इसके अलावा, उम्मीदवारों को आयु सीमा में छूट और फिजिकल टेस्ट में विशेष लाभ भी मिल रहे हैं।
आगे क्या होगा?
अब सबकी नजरें सरकार के उस फैसले पर हैं जो अग्निपथ स्कीम के भविष्य को तय करेगा। रिटेंशन नियमों में कोई भी बदलाव या ट्रेनिंग प्रोटोकॉल में सुधार सरकार द्वारा मिलने वाली सिफारिशों पर निर्भर करेगा।
