Indian Agritech: बिचौलियों को हटाने की होड़ खत्म, अब इंफ्रास्ट्रक्चर पर दांव लगा रही हैं कंपनियां

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Indian Agritech: बिचौलियों को हटाने की होड़ खत्म, अब इंफ्रास्ट्रक्चर पर दांव लगा रही हैं कंपनियां

भारतीय एग्रीटेक कंपनियां अब केवल बिचौलियों को हटाने के पुराने मॉडल से आगे बढ़ रही हैं और इंफ्रास्ट्रक्चर-आधारित सेवाओं पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। सरकारी 'Digital Agriculture Mission' के लिए आवंटित **₹2,817 करोड़** के फंड के साथ, पूरा सेक्टर अब तेजी से यूजर बेस बढ़ाने के बजाय ऑपरेशनल एफिशिएंसी को प्राथमिकता दे रहा है।

एग्रीटेक सेक्टर में एक बड़ा रणनीतिक बदलाव देखने को मिल रहा है। पहले कंपनियां मानती थीं कि टेक्नोलॉजी का उपयोग करके सप्लाई चेन से बिचौलियों को हटाना ही एकमात्र रास्ता है, लेकिन अब उन्हें समझ आ रहा है कि स्थानीय व्यापारी और कमीशन एजेंट क्रेडिट, क्वालिटी असेसमेंट और लॉजिस्टिक्स जैसी जरूरी सेवाएं देने में माहिर हैं, जिन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म्स आसानी से रिप्लेस नहीं कर पाए।

'डिजिटल रेल्स' की ओर बढ़ते कदम

अब बिजनेस मॉडल ग्रामीण इकोसिस्टम को दरकिनार करने के बजाय उसे मजबूत करने पर टिका है। सरकारी 'Digital Agriculture Mission' के तहत आवंटित ₹2,817 करोड़ इस बदलाव में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। इस मिशन का मकसद 'डिजिटल रेल्स' तैयार करना है। अगस्त 2026 तक, सरकार 'AgriStack' पहल के तहत 10.31 करोड़ से ज्यादा यूनिक फार्मर आईडी बना चुकी है। यह डेटा बेस प्राइवेट कंपनियों को क्रेडिट अंडरराइटिंग और क्रॉप इंश्योरेंस जैसी सेवाएं देने की शक्ति देता है, जो मामूली मार्जिन वाले ई-कॉमर्स मॉडल से कहीं ज्यादा मुनाफे वाला है।

प्रॉफिटेबिलिटी पर निवेशकों की नज़र

2021 के दौर की तुलना में अब निवेश का मिजाज बदल चुका है। अब निवेशक सिर्फ यूजर्स की संख्या नहीं, बल्कि यूनिट इकोनॉमिक्स और प्रॉफिटेबिलिटी देख रहे हैं। जो कंपनियां वेयरहाउसिंग और कलेक्शन सेंटर जैसे फिजिकल एसेट्स को डिजिटल डेटा के साथ जोड़ रही हैं, उन्हें ज्यादा तवज्जो मिल रही है। 'Arya.ag' जैसी कंपनियां इसका बेहतरीन उदाहरण हैं, जो ग्रेन कॉमर्स और स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस कर रही हैं।

चुनौतियां और जोखिम

हालांकि, इंफ्रास्ट्रक्चर-आधारित मॉडल अधिक टिकाऊ दिखते हैं, लेकिन राह आसान नहीं है। ग्रामीण इलाकों में 'डिजिटल डिवाइड', स्मार्टफोन तक सीमित पहुंच और डेटा साक्षरता की कमी रफ्तार को धीमा कर सकती है। इसके अलावा, भारत में औसत जमीन जोत का आकार करीब 3 एकड़ ही है, जो स्केलेबिलिटी के लिए एक बड़ी बाधा है। डेटा गवर्नेंस और राज्यों के बीच तालमेल का अभाव भी डेटा सिक्योरिटी से जुड़े जोखिम पैदा कर सकता है। निवेशकों के लिए असली परीक्षा यह होगी कि ये स्टार्टअप्स फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने की लागत और उससे होने वाली लंबी अवधि की कमाई में कैसे संतुलन बनाते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.