वैश्विक बाजारों में बॉन्ड यील्ड में भारी उछाल के बावजूद, भारतीय सरकारी बॉन्ड में मजबूती बनी हुई है। 10-साल के बेंचमार्क यील्ड लगभग **6.77%** पर स्थिर हैं। यह स्थिरता मुख्य रूप से घरेलू महंगाई के काबू में रहने और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सतर्क प्रबंधन के कारण है। हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसे बाहरी जोखिमों पर निवेशकों को नजर रखनी चाहिए।
स्थिरता के पीछे के कारक
भारतीय बॉन्ड मार्केट अगस्त 2026 के मध्य में काफी लचीला बना हुआ है, जो कई वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं में बॉन्ड यील्ड में देखी गई तेज बढ़ोतरी से अलग है। जहां प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उधारी की लागत बढ़ रही है, वहीं भारत का 10-साल का बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड यील्ड एक सीमित दायरे में कारोबार कर रहा है, जो हाल ही में 6.77% से 6.78% के आसपास बना हुआ है।
इस स्थिरता की जड़ें घरेलू कारकों में हैं। हालिया आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 के लिए भारत की खुदरा महंगाई दर 4.45% दर्ज की गई, जो पिछले महीने के 4.38% से थोड़ी अधिक है, लेकिन अभी भी सहनशील दायरे में है। महंगाई का यह नियंत्रित रुख, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के सतर्क और तटस्थ मौद्रिक नीति रुख के साथ मिलकर, घरेलू उधारी लागतों को बढ़ने से रोकने में सहायक रहा है।
इसके अतिरिक्त, सरकार के राजकोषीय प्रबंधन ने भी विश्वास बनाए रखने में भूमिका निभाई है। हाल की सरकारी प्रतिभूति नीलामी में स्थिर मांग यह दर्शाती है कि संस्थागत निवेशक सरकारी उधारी कार्यक्रम को लेकर सहज हैं, जो वैश्विक झटकों से एक सुरक्षा कवच प्रदान करता है।
